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Post: मछली के आचार का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

मछली के आचार का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र

बगहा पुलिस जिला ब्यूरो नसीम खान “क्या” की रिपोर्ट :

गंडक बराज पर लगा है स्टॉल

एक हज़ार से बारह सौ किलो बिकता है रेहु केतला चेपुका आचार

न्यूज़ डेस्क, बगहा पुलिस जिला 

नसीम खान “क्या”

– अमिट लेख
बगहा, ( ब्यूरो रिपोर्ट)। बगहा-हरनाटांड़ बाहुल्य क्षेत्र की आदिवासी महिलाएं एनजीओ से जुड़कर मछली का आचार बनाकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। बतादें, की बगहा अनुमंडल स्थित मझौआ गांव की आदिवासी महिलाएं हैंड मेड फिश पिकल बना रही हैं।

फोटो : नसीम खान “क्या”

मझौआ गांव के राम सिंह ने बताया कि उत्तराखंड से उन्होंने 21 दिनों का मछली का आचार बनाने का प्रशिक्षण लिया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर वह गांव के आसपास की महिला को जोड़कर प्रशिक्षित कर कारोबार शुरू किया। इन्होंने आगे बताया कि गंडक नारायणी नदी इनके लिए वरदान साबित हुई है, क्योंकि इस नदी में विभिन्न प्रकार की प्रजातियों की मछलियां मिल जाती है।जिसका अचार बाजार में ऊंचे दामों में बिकता है।जीविका के द्वारा लगाए जाने वाली प्रदर्शनी मेलों में स्टॉल से प्रचार मिल जाता है।साथ ही हरनाताड़ में इसका स्थायी स्टॉल लगाया गया है,दिल्ली जैसे शहर में ही विशेष मौके पर स्टॉल लगाए जाते हैं। संचालक राम सिंह ने बताया कि रेहु, केतला, चेपुआ मछली के आचार 1000 से 1200 सौ रुपये तक मे बिकते हैं और अन्य मछलियों के आचार 500 से 900 रुपये तक मे बिकते हैं। राम सिंह का मानना है कि सरकार मदद करे मसलन मार्केटिंग,बाजार,आर्थिक सहयोग तो कारोबार को काफी आगे बढ़ाया जा सकता है और महिला सशक्तिकरण के परिप्रेक्ष्य में महिलाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। बहरहाल राम सिंह ने गाड़ी पर लगे दुकान को गंडक बराज के लैंड कस्टम के समीप स्टॉल लगा प्रचार कर रहे हैं।

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