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Post: अपहरण के बाद मुख्यमंत्री आवास में होता था सेटलमेंट : साधु यादव

अपहरण के बाद मुख्यमंत्री आवास में होता था सेटलमेंट : साधु यादव

विशेष ब्यूरो बिहार दिवाकर पाण्डेय की रिपोर्ट :

लालू यादव करवाते थे डील’ साले सुभाष यादव का आरोप

न्यूज़ डेस्क, राजधानी पटना

दिवाकर पाण्डेय
-अमिट लेख
पटना, (ए.एल.न्यूज़)। नब्बे के दशक में लालू-राबड़ी के शासनकाल में सीएम हाउस में दो लोगों का दबदबा था। वो दो लोग कोई और नहीं बल्कि लालू यादव के साले साधु यादव और सुभाष यादव थे। कहा जाता है कि लालू यादव इन दोनों से हमेशा घिरे रहते थे, लेकिन धीरे-धीरे रिश्तों में खटास आ गई और अब सबसे छोटे साले सुभाष यादव की लालू परिवार से बिल्कुल नहीं बनती। ऐसे में सुभाष यादव ने लालू परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एक ओर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं तो दूसरी ओर उन्हें और उनके परिवार को सुभाष यादव से चुनौती मिल रही है। उनके साले सुभाष यादव ने लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है। सुभाष यादव ने कहा है कि लालू प्रसाद यादव अपराधियों को संरक्षण देते थे और मुख्यमंत्री निवास पर ही डीलिंग होती थी। “नब्बे के दशक में जो अपहरण हुआ करते थे उसमें बंधक को छुड़ाने के लिए फिरौती की डील लालू यादव करवाते थे साधु यादव और सुभाष यादव को गलत बदनाम किया जाता है. हमने कोई अपराध नहीं किया है. मेरे अलग होने के बाद लालू प्रसाद यादव का पतन शुरू हुआ और वह 20 सीटों पर सिमट गए। इस बार फिर 20 सीटों से नीचे आ जाएंगे सुभाष यादव, पूर्व सांसद व लालू के साले, सुभाष यादव ने कहा हम लोग कभी कुछ नहीं किए। एक अपहरण पूर्णिया और अररिया साइड में हुआ था। उसका पैसा कौन लिया। किसके ऊपर आरोप लग रहा था, सबको पता है। अभी शहाबुद्दीन तो हैं नहीं सच्चाई बताने के लिए। जाकिर हुसैन पर आरोप लगा था। शहाबुद्दीन, प्रेमचंद गुप्ता और लालू का फोन जाकिर हुसैन के पास जाता था। सुभाष यादव ने लालू पर हमला करते हुए कहा कि राजनीति से मैंने दूरी बना ली है, इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं खुद जिम्मेदार हूं. राजनीति में हम पहले बहुत लिहाज करते थे। जिस दल में है, उसकी बुराई मत कीजिए। पौधा लगाइये और जवान होने पर काट दीजिए, ये कहां का नियम है। हमने ना चोरी किया, ना डकैती, ना अपहरण, ना हत्या, ना किसी की जमीन लिखवायी, ना अलकतरा घोटाला किया, ना पशुपालन घोटाला किया, फिर क्यों बदनाम कर दिए।उन्होंने आगे कहा कि लालू मेरे बारे में कभी नहीं सोचते हैं। वो सिर्फ अपना काम कराना चाहते हैं। जब आप पैदा किए तो उसको संवार कर रखिएगा या नहीं? 2024 में बोले कि समझो तुम भी तेज प्रताप हो। क्या हो गया 2004 बीत गया तो मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिए। हमें निकालना था तो हर जगह लालू बोलते थे कि यही दोनों (साधु यादव और सुभाष यादव) बदनाम किया। सुभाष ने कहा कि कौन चोर है पता चल गया, सजा हो गयी। अभी भी पूरी फैमिली कोर्ट जा रही है। हम उनके पास नहीं जाते क्योंकि लालू राबड़ी ने प्रतिबंध लगा दिया है। बिहार के मालिक लालू थे। वही सीएम हाउस से फोन करते थे। किडनैपर से बात करते थे, बोलते थे ऐसा मत करो। जंगलराज का आरोप हमारे कारण क्यों लगेगा, हम लोग थे क्या?

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