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Post: राजनितिक संरक्षण में चिकित्सक, प्राथमिकी दर्ज गिरफ़्तारी नहीं

राजनितिक संरक्षण में चिकित्सक, प्राथमिकी दर्ज गिरफ़्तारी नहीं

पश्चिम चम्पारण से हमारे जिला ब्यूरो की रिपोर्ट :

शासन सत्ता दल से जुड़े होने के कारण अबतक मामले से जुड़े प्राथमिकी अभियुक्त चिकित्सक की गिरफ्तारी नही हो पायी है

भीम आर्मी के नेताओं ने नरकटियागंज के चिकित्सा अधिकारी और सीओ को भ्रष्ट बताते हुये उनको हटाने की भी मांग की 

शासन सत्ता से जुड़े प्राथमिकी अभियुक्त की गिरफ्तारी 24 घंटे के अंदर करने हेतु सभास्थल से एसडीएम और एसडीपीओ नरकटियागंज से नेताओं ने की मांग 

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

पश्चिमी चम्पारण, (अमित तिवारी)। चर्चित मामला नरकटियागंज अनुमंडल परिसर में पिछले दिनों चतुर्भुजवा गावं की प्रसूता प्रियंका कुमारी की आप्रेशन के बाद होश नही आने के बाद इमर्जेंसी हॉस्पिटल द्वारा रेफर कर दिए जाने से जुड़े मौत का है।

फोटो : अमित तिवारी

विदित हो कि यह मामला जदयू के जिला अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ सचिव सह डाक्टर सद्दाम के विरुद्ध है। जिनपर पीड़ित परिजनों की ओर से प्राथमिकी दर्ज हुआ था। लेकिन शासन सत्ता दल से जुड़े होने के कारण अबतक मामले से जुड़े प्राथमिकी अभियुक्त चिकित्सक की गिरफ्तारी नही हो पायी है। लिहाजा, परिजनों मे काफी आक्रोश है।

शासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ इस मामले को लेकर बीते दिवस भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने नरकटियागंज अनुमंडल परिसर में एक दिवसीय धरना दिया। धरणार्थीयों के साथ परिजनों का कहना है कि नरकटियागंज के सभी नीजी क्लिनिक की जांच हो और फर्जी पाये जाने वाले क्लिनिक पर कारवाई की जाये। धरना को सम्बोधित करते हुये समाजसेवीयों ने नरकटियागंज सदर हॉस्पिटल के चिकित्सा अधिकारी को भ्रष्ट बताते हुये उन्हें अविलम्ब बर्खास्त करने की मांग तो की हीं, उन्होंने नरकटियागंज सीओ को भी भ्रष्ट बताते हुये उनपर गरीबों की हक़दारी में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया। उनका यह भी कहना है कि पिछले दिनों एक बार फर्जी क्लिनिक सील किया गया था लेकिन, मौत के सौदागरों के पक्ष में आखिर किसकी कारगुजारी से ऐसा क्लिनिक फिर कैसे संचालित होने लगा। उन्होंने नरकटियागंज अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा और मांग किया की डॉक्टर सद्दाम की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आगे के दिनों में जिलाव्यापी आंदोलन छेड़ने के साथ हम लोग सड़क जाम करने पर मजबूर होंगे। जनता की नसों को टटोलें तो जब से प्रदेश में भाजपा-जदयू की डबल इंजन की सरकार आरुढ हुई है, आम जनों की स्वतंत्रता और लोक अभिव्यक्तियों के दमन का सिलसिला चालु है और प्रशासन मूक दर्शक बनता नजर आ रहा है।

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