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Post: जिला पदाधिकारी ने ‘ज्ञान भारतम्’ से जुड़ने की अपील की

जिला पदाधिकारी ने ‘ज्ञान भारतम्’ से जुड़ने की अपील की

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा : 

ज्ञान भारतम् अभियान : अब हर नागरिक बनेगा विरासत का रक्षक

देश की पांडुलिपि धरोहर को बचाने का मौका 

हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए यह एक सुनहरा अवसर है

अधिक से अधिक लोग ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप डाउनलोड करें या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सर्वे में भाग लें

इच्छुक व्यक्ति मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से अपनी जानकारी साझा कर सकते हैं

QR कोड स्कैन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। जिला पदाधिकारी, तरनजोत ने जिलेवासियों से प्राचीन पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि वैसे व्यक्ति अथवा संस्था जिनके पास पुरानी पांडुलिपि है, वे पांडुलिपि के सर्वेक्षण में अपना योगदान दें।

संग्रहणीय

उन्होंने बताया कि पाण्डुलिपियों का तात्पर्य कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा, धातु आदि पर हाथ से लिखे गए ग्रन्थ जो न्यूनतम 75 वर्ष प्राचीन हों, से है। ये पांडुलिपि किसी भी भाषा और लिपि में हो सकते हैं। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, श्री राकेश कुमार ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम्” राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत आम नागरिकों को भी इस महत्वपूर्ण पहल से जोड़ा जा रहा है।उन्होंने कहा कि देशभर में बिखरी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों को चिन्हित कर उनका डिजिटल संरक्षण करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए ज्ञान भारतम् प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन सर्वे चलाया जा रहा है, जिसमें कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी के पास ऐसी पांडुलिपियां हैं जो अभी तक सूचीबद्ध या पंजीकृत नहीं हैं, या अपने समुदाय में पांडुलिपियों की जानकारी है, अथवा कोई संस्था/परिवार इनके संरक्षण का कार्य कर रहा है—तो वे इस अभियान से जुड़कर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। अधिक से अधिक लोग ‘ज्ञान भारतम्’ ऐप डाउनलोड करें या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सर्वे में भाग लें।” अभियान के तहत इच्छुक व्यक्ति मोबाइल ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से अपनी जानकारी साझा कर सकते हैं। इसके लिए QR कोड स्कैन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।उन्होंने जिले के सभी नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों एवं शोधकर्ताओं से इस पहल में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत को सुरक्षित रखा जा सके।

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