बगहा से हमारे न्यूज़ ब्यूरो की रिपोर्ट :
ऐसा प्रतीत हो रहा कि इस भू-विवाद में बगहा सीओ सीधे तौर पर नाजायज अतिक्रमणकारी महिलाओं से विशेष तौर पर प्रभावित हैँ
मंगलवार को अंचल में उपस्थिति देगा दोनों पक्ष, यदि अतिक्रमण हटाने के निमित्त सीओ बगहा -2 अपना रुख स्पष्ट नहीं करते तो पीड़ित पक्ष वरीय पदाधिकारियों समेत शासन सत्ता से लगाएगा न्याय की गुहार
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बगहा, (भगवान सिंह)। पिछले सोमवार के दिन बगहा-2 अंचल में जन सुनवाई की गहमा-गहमी बनी रही। अंचल कार्यालय में जहाँ अंचलाधिकारी वसीम अकरम भू-विवाद से जुड़े दर्जनों मामलों को तन्मयता से सुलझाते दिखे, तो वहीँ सेमरा पुलिस थाना क्षेत्र का एक भू-अतिक्रमण का मामला चर्चा का विषय रहा।

बताते चले ओझवलिया के एक प्रतिष्ठित घराने की पथ निर्माण विभाग से उबरी कास्त जमीन पर गांव के हीं एक परिवार द्वारा क़ानून को धत्ता बता कब्जेवारी का खेल खेलते हुये अनैतिक कब्ज़ा करने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। जानकारी के मुताबिक ओझवलिया निवासी विनोद सिंह ने उक्त अतिक्रमण के विरुद्ध भूमि उप-समाहर्ता बगहा के न्यायालय में विपक्षी गण अमर चौधरी वगैरह के विरुद्ध एक वाद -99/2025-26 दायर किया था, जिसमें समस्त भू अभिलेख के जांचोपरान्त यह स्पष्ट किया गया की अतिक्रमण से जुड़ी भूमि आवेदक की पुश्तैनी दस्तावेजी जमीन है, तथा पूर्व के दशकों में उक्त भूमि का एक बड़ा हिस्सा बगहा-सेमरा मुख्य पथ निर्माण काल में सरकार द्वारा अधिगृहित किया जा चुका है, साथ ही उससे उबरी लगभग डेढ़ कट्ठा जमीन आवेदक के परिवारिकजनों द्वारा नियमित जोत-आबाद भी किया जाता रहा है, परन्तु दो वर्ष पूर्व से ग्रामीण राजनीति और द्वेषपूर्ण नीयत से ओत-प्रोत मानसिकतावाले झोंटिल चौधरी के परिवारिकजनों द्वारा बाबू जमुना सिंह के नाम चल रही जमाबंदी से जुड़े पथ निर्माण विभाग से अतिरिक्त उनकी कास्त भूमि का कुछ हिस्सा गसबन कर लिया गया है। हालांकि भूमि उप-समहर्ता बगहा द्वारा उक्त मामला 99/2025-26 के आलोक में स्पष्ट निर्देश दिया गया है की उक्त भू-पैमाइश कराकर उक्त गसबन किये जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाये। जिसके निमित्त पक्षकार विनोद सिंह द्वारा अंचल कार्यालय में नियमानुकूल आवेदन के साथ सरकारी अमीन द्वारा उक्त भूमि की पैमाइश हेतु सभी औपचारिकता पूरा भी कर लिया गया। तथा बीते सप्ताह 25 तारीख को जब सेमरा पुलिस तत्परता के साथ भू पैमाइश में अड़ंगा डाल रहे अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोलने में जुटती नज़र आई, अचानक थानाध्यक्ष सेमरा के मौके पर पहुँचते हीं अतिक्रमणकारी महिलाओं को तसल्ली दिलाने का काम बगहा सीओ द्वारा किये जाने की खबर है।

ज्ञातव्य हो कि जैसे हीं मौके पर नापी कार्यवाई में अड़चन महसूस किया गया पुलिस जिला बगहा से अतिरिक्त पुलिस बल और विशेष रूप से महिला पुलिस को बुलाने की कवायद शुरू की गईं। अचानक जैसे हीं थानाध्यक्ष मैडम मौके पर पहुंची भूमि उप समाहर्ता के स्पष्ट निर्देश को ठन्ढ़े बस्ते में डालने की प्रक्रिया शुरू हो गईं। ऐसा प्रतीत हो रहा कि इस भू-विवाद में बगहा सीओ सीधे तौर पर नाजायज अतिक्रमणकारी महिलाओं से विशेष तौर पर प्रभावित हैँ? लिहाजा, इस बाबत सेमरा थानाध्यक्ष को सेल फोन पर सीओ बगहा ने अतिक्रमण खाली कराने अथवा भूपैमाइश कराने में सहयोग करने के बजाय सीधे दोनों पक्षो को अंचल कार्यालय आकर विचार-विमर्श का निर्देश दे डाला। सीओ बगहा का यह निर्णय फिलहाल अतिक्रमणकारी पक्ष के मनोबल को और बढ़ाने का जहाँ काम किया वहीँ दूसरी ओर भू स्वामी के पारिवारिक जनों को न्याय प्रदान करने के बजाय भूमि उप समाहर्ता के स्पष्ट आदेश को ठेंगा भी दिखाने वाली करतब महसूस की जा रही है। उक्त भूमि के एक फरिकैन अमरेश कुमार सिंह जो ‘अमिट लेख’ के प्रधान संपादक हैँ ने स्पष्ट किया है कि, किन्हीं तकनिकी कारणों के मद्देनजर बगहा अंचल अधिकारी श्री अकरम ने पुनः दोनों पक्षो को 2 जून मंगलवार को बुलाया है तथा जिसमें सेमरा थानाध्यक्ष कि भी उपस्थिति संभावित है, लिहाजा, दोनों पक्ष इस विशेष दिन अंचल में हाजिरी देंगे। जहाँ तक, मामला भूमि उप समाहर्ता बगहा के निर्देश के अनुपालन का है तो यदि अंचल अधिकारी बगहा -2 किसी भी प्रकार से अक्षम परिलक्षित होते हैँ तो क़ानून के देश भारत में न्याय कि मुहिम को तेज करते हुये पीड़ित पक्ष द्वारा आगामी दिवस अंचल प्रशासन को अतिक्रमण का एक हिस्सा मानते हुये वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों समेत शासन सत्ता से इस विषयक सभी साक्ष्यों के साथ उचित और शीघ्र कार्यवाई करने के साथ अतिक्रमण के इस खेल में शामिल सभी जनों के विरुद्ध शिकायत की जाएगी ताकी प्रदेश सरकार को भू विवाद निपटारे में आसन्न अंचल कार्यालयों के साँप सीढी के ऐसे खेल से आम जनों को त्वरित न्याय के साथ राहत मिल सके।








