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Post: मोतिहारी के मोतीझील अतिक्रमण मामले में पटना हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

मोतिहारी के मोतीझील अतिक्रमण मामले में पटना हाई कोर्ट में हुई सुनवाई

रिपोर्ट : पटना डेस्क

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई में हलफनामा दायर कर बताने को कहा हैं कि वार्ड पार्षद को हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अधिकार नहीं हैं

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

पटना, (विशेष ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने मोतिहारी शहर के मोतीझील बुढ़ी गंडक नदी से निकले ब्रिटिश कालीन नहर को रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है, के दोनों ओर हुए अतिक्रमण के मामलें पर सुनवाई की। एक्टिंग चीफ सुधीर सिंह की खंडपीठ ने भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका की सुनवाई की। चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव की खंडपीठ ने भारतीय न्यायप्रिय नागरिक परिषद की जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मोतीहारी नगर निगम के वार्ड नंबर 18 के सदस्य संजय जायसवाल ने कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका डाल कर बताया कि ये नहर नहीं, बल्कि एक नाला हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने इस हस्तक्षेप याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जब कि मोतिहारी नगर निगम स्वयं पार्टी हैं, तो वार्ड पार्षद के हस्तक्षेप याचिका दायर करने का कोई अधिकार ही नहीं हैं।उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, मोतिहारी नगर निगम और राज्य सरकार इसे नहर मान रही हैं।जिला प्रशासन ने बताया कि नहर के आसपास हुए अतिक्रमण करने वालों को नोटिस दे दिया गया हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया की नहर के आसपास बडे बडे पेड हो गये हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई में हलफनामा दायर कर बताने को कहा हैं कि वार्ड पार्षद को हस्तक्षेप याचिका दायर करने का अधिकार नहीं हैं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने डीएम, पूर्वी चंपारण के 4 जून, 2026 के पत्र के सन्दर्भ में हुई कार्रवाईयों पर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने कोर्ट को बताया था कि मोतिहारी शहर के मोतीझील को बुढ़ी गंडक नदी पर स्थित रामरेखा घाट सिमरा से जोड़ता है।इसकी लम्बाई लगभग ग्यारह किलोमीटर है। मोतीझील को शहर की जीवनरेखा भी कहा जाता है। इससे मोतिहारी शहर को पेय जल मिलता है। साथ ही बाढ़ के समय ये नहर इस शहर को बाढ़ से बचाता है। अधिवक्ता विकास पंकज ने बताया था कि 24 दिसंबर,2022 को कार्यपालक अभियंता,तिरहुत कैनाल डिवीज़न , मोतिहारी ने इस सम्बन्ध में पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी को पत्र लिखा,जिसमें इस नहर को बाढ़ के समय अतिउपयोगी और मोतीझील को रिचार्ज करने का वैकल्पिक श्रोत बताया गया था। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिलाधिकारी,पूर्वी चम्पारण ने इसके जाँच के लिए एक कमिटी गठित की और जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था । अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने बताया था कि काफी बैठकें हुई,लेकिन अबतक कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं दिया गया था। इससे मोतिहारी शहर के नागरिकों को काफी कष्ट और असुविधा हो रही है। इस मामलें पर अगली सुनवाई 30 अक्टूबर, 2026 को की जायेगी।

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