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राजयोग शिविर में गिरीश ने बताया आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ

रिपोर्ट : छपरा डेस्क, 04 अक्टूबर 2026

कहा- मन की शांति और कर्म की सच्चाई ही पहचान

छपरा में तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ, अंतर्राष्ट्रीय काउंसलर ईवी गिरीश ने कहा- पूजा- पाठ से आगे है आध्यात्मिक जीवन

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख
छपरा, (सारण)। स्थानीय भिखारी ठाकुर प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय राजयोग शिविर का रविवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय काउंसलर ईवी गिरीश (मुंबई), सीपीएस ग्रुप के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय छपरा की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी अनामिका दीदी, छपरा जंक्शन के स्टेशन डायरेक्टर राजेश प्रसाद, बीके रानी बहन और बीके उर्मिला बहन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

फोटो : संवाददाता

शिविर के पहले दिन बड़ी संख्या में लोगों ने राजयोग और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विचारों को सुना। अंतर्राष्ट्रीय काउंसलर ईवी गिरीश ने ‘आध्यात्मिकता की सत्य पहचान’ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा- पाठ अथवा धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक पहचान व्यक्ति के विचार, व्यवहार और जीवन जीने के तरीके से होती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता की पहली पहचान मन की शांति है। परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति अपने भीतर शांति और संतुलन बनाए रखे। बाहरी परिस्थितियों पर नियंत्रण हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन अपने मन और प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखा जा सकता है।उन्होंने दूसरी पहचान व्यवहार में करुणा को बताया। उनके अनुसार अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष से ऊपर उठकर दूसरों के प्रति प्रेम, क्षमा और संवेदना का भाव रखना ही आध्यात्मिकता का वास्तविक स्वरूप है। व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रगति उसके व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए। ईवी गिरीश ने तीसरी पहचान कर्म में सच्चाई बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक व्यक्ति दिखावे से दूर रहता है और ईमानदारी, संयम तथा निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को जीवन में उतारना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सच्ची आध्यात्मिकता वही है, जो इंसान को भीतर से बेहतर, मन से शांत और व्यवहार से सरल बनाए। राजयोग के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक दिशा देकर जीवन में संतुलन और आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है। शिविर के आयोजन का उद्देश्य लोगों को राजयोग, आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। तीन दिवसीय शिविर में आध्यात्मिकता, तनाव प्रबंधन, मन की शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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