समस्याग्रस्त बिहारियों के तारणहार होंगे प्रशांत किशोर
न्यूज़ डेस्क, मोतिहारी ब्यूरो
दिवाकर पाण्डेय
– अमिट लेख
मोतिहारी, (जिला ब्यूरो)। जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर की पदयात्रा पिछले एक अक्टूबर से जगत जननी मां जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी जिले में जारी है। पदयात्रा के तेरहवें महीने में यह दसवां जिला है। प्रशांत किशोर और उनके सैकड़ों सह पदयात्रियों की टीम गांव-गांव पैदल चलकर लोगों से मिल रही हैं, उनकी हालत देख – समझ रही हैं, समस्याओं को लिपिबद्ध कर रही हैं, लोगों से संपर्क कर उनकी फटेहाली और मुफलिसी को नजरबंद कर रही हैं। इस दौरान उनके स्वागत – सत्कार में सड़कों पर, गांवों में उमड़ रही लोगों की भीड़ जिसमें बच्चे – बूढ़े,युवक – युवतियां, महिलाएं बड़ी संख्या में फूल मालाओं से स्वागत करते दिख रहे हैं। लोगों की यह उत्साहित भीड़ मानो यह संकेत दे रही है कि यहां बदलाव की बयार बहने लगी है। उक्त जानकारी मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार ठाकुर ने दी। उन्होंने बताया कि जिन गांवों से प्रशांत गुज़र रहे हैं वहां का दृश्य ऐसा है मानो वर्षों से समस्याओं के मकड़जाल में फंसकर गांवों की सिसकती जिन्दगियों को राहत की उम्मीद देने कोई तारणहार आ गया हो। आशा भरी निगाहें प्रशांत की ओर देख रही है। लोग जिस राजनीतिक विकल्प की बाट जोह रहे थे उसकी उम्मीद जन सुराज और प्रशांत किशोर के रूप में सामने दिखाई देने लगी है। अब तक नेताओं ने लोगों को जात-पांत और धर्म- मजहब में बांट कर अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहे हैं। राजद एम वाई समीकरण (मुस्लिम+ यादव) बना कर पन्द्रह वर्षों तक बिहार की सत्ता पर काबिज तो रहा किन्तु उसने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया। उनका मकसद लोगों को मूर्ख बना कर उलझाए रखना और सत्ता पर बरकरार रहना था। इस शासनकाल में अपराध चरम पर पहुंच गया और लोग इसे जंगल राज की संज्ञा देने लगे। अन्य लोगों के साथ – साथ न तो यादवों को कोई लाभ मिला और ना ही मुस्लिम समाज को। सर्वाधिक ठगी के शिकार मुस्लिम समाज हुआ। उन्हें ना तो आबादी के हिसाब से राजनीतिक भागीदारी मिली और ना ही उनके गांवों का विकास हुआ। मदरसों की हालत खस्ता ही रही और मोदर्रिसों की माली हालत में कोई सुधार नहीं हो सका। अलबत्ता उनके बच्चे दीनी और दुनियाबी तालीम से अन्य लोगों की तरह महरुम रहे। अलबत्ता यादवों की राजनीतिक भागीदारी तो बढ़ी किन्तु शिक्षा की उच्च स्तरीय व्यवस्था नहीं होने के कारण उनके बच्चे भी अन्य वर्गों के बच्चों की तरह पिछड़ते चले गए। हां फायदा लालू यादव जी को तथा उनके परिवार को अवश्य मिला। राजनीतिक ओहदों और मंत्रीमंडल पर परिवार का वर्चस्व सर्वाधिक रहा और अब तो नौवीं फेल उनका पुत्र तेजस्वी राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित है। जब जंगल राज चरम पर पहुंचा तो एक योग्य नेतृत्व के रूप में नीतीश कुमार सामने आये जिसने भाजपा से गठबंधन कर बिहार का सत्ता हासिल कर लिया। इनसे लोगों की उम्मीदें परवान पर थी किन्तु सत्ता का स्वाद चखते ही बिहार का विकास पीछे छूट गया और कूर्सी बचाने के खेल ज्यादा होने लगे। इस राज में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक रसातल में पहुंचा दिया गया। लालू राज की तरह नीतीश- भाजपा राज ने न तो उद्योग धंधे खोले और ना ही कल – कारखानों को स्थापित किया। बेरोज़गारी सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी की खड़ी ही रही। बिहारी मजदूरों,ईन्जिनियरों, छात्रों और अन्य बेरोजगारों का अन्य प्रदेशों में पलायन बदस्तूर जारी रहा। कूर्सी मोह इतना कि कभी लालू प्रसाद यादव के जंगल राज को कोसकर सत्ता हथियाने वाले नीतीश कुमार का जदयू लालू यादव के राजद की गोद में तो कभी भाजपा की शरण में आते – जाते रहे। बत्तीस वर्षों के इस राजद-जदयू और भाजपा के शासन ने आम बिहारियों की कमर ही तोड़ डाली। शिक्षा चौपट, खेती किसानी घाटे का कारोबार, बढ़ती बेरोज़गारी, पंचायत से लेकर मंत्रालय तक व्याप्त घनघोर भ्रष्टाचार और अफसरशाही ने बिहारियों को भिखमंगा बना कर रख दिया है। पिछले दस सालों से मोदी राज को भी हम सभी देख रहे हैं। गुजरात का विकास तो हम देख रहे हैं जहां रोज़- रोज़ नई फैक्ट्रियां खोली जा रही है, एक लाख करोड़ की लागत से बुलेट ट्रेन बनाए जा रहे हैं पर बिहार के लिए कुछ भी नहीं। बिहार में कोई कल कारखाना इस मोदी राज में नहीं खोले गए। मोतिहारी – सीतामढ़ी भाया शिवहर रेल मार्ग संचिकाओं की शोभा बढ़ा रहे हैं। रीगा चीनी मिल तीन वर्षों से बंद पड़ा है जहां किसानों के करोड़ों रुपए बकाया है। यह जानते हुए भी कि बिहार देश का सबसे अशिक्षित, गरीब और पलायन करने वाला प्रदेश है प्रधानमंत्री मोदी जी ने कभी एक मिनट के लिए भी बिहार के विकास के सवाल पर कोई बैठक तक नहीं की। उनका छप्पन ईंच का सीना बिहारियों के लिए कोई काम नहीं आया। अलबत्ता आम बिहारियों के बच्चों का सीना भूख से सिकुड़ता अवश्य जा रहा है। हम बिहारियों को आजादी के बाद से लेकर अब तक धोखा ही हासिल हुआ है। हमारे प्रदेश को न सुधरने वाला राज्य मानकर मजदूर बनाने की फैक्ट्री बना दी गयी है। सच है ,जब -जब धरती पर संकट आता है, मानवता कल्याण, न्याय और विकास के लिए कराहती है तब- तब ईश्वरीय शक्ति लेकर किसी महामानव का प्राकट्य होता है। अशांत मानवीय हृदय को शांत करने प्रशांत आया है। लोग उनमें तारणहार की छवि देख रहे हैं। ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपनी सारी कमाई जन सुराज के लिए झोंक दिया है। सभी सुख – सुविधाओं का परित्याग कर यह फकीर बिहारियों की तकदीर और तस्वीर बदलने निकल पड़ा है। गांवों में ग़रीबी और फटेहाली से कराह रही जिन्दगियों को अपनी ताकत का एहसास कराने की पदयात्रा करता यह शख़्स न धूप न बरसात और ना ठंढक से विचलित हो रहा है। रात- दिन बिहारियों को एकजुट कर उसके भाग्य को बदलने का मंत्र लोगों को बता रहे हैं। बिहार को ग़रीबी से बाहर निकल आने की तरकीब समझा रहा है। अच्छी व उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था, मुनाफेदार खेती – किसानी और रोजगार के लिए पूंजी की व्यवस्था कैसे की जाएगी इसकी समझ पैदा कर रहा है। ग्रामीणों को जात-पांत और धर्म – मजहब के घनचक्कर से बाहर निकल अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य निर्माण के लिए बच्चों का चेहरा देखकर वोट करने का सबक़ सिखा रहे हैं। इतिहास में बहुत सी पदयात्राएं हुई हैं, अधिक या कम। किन्तु वे पदयात्राएं कमीशन के लिए यात्रा थी और प्रशांत की पदयात्रा मिशन के लिए यात्रा है। मिशन है , बिहार को अपनी बदहाली पर छोड़ न सुधरने वाला राज्य बना देने वाले राजनेताओं के जातिवादी और धर्म की राजनीतिक बेड़ियों से छुटकारा दिला कर जनता का सुन्दर राज कायम कर लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने का। जब अंग्रेजों का जुल्मो-सितम था तब महात्मा गांधी का प्रदुर्भाव हुआ था। गांधी ने गरीब -अमीर,हिन्दु -मुसलमान, सिख- ईसाई, किसान – मजदूर,औरत – मर्द, छात्र – नौजवान सभी को संगठित किया, सत्याग्रह की तब जाकर अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिली और लम्बे जद्दोजहद के बाद आखिर भारत आजाद हुआ। ठीक महात्मा गांधी, बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर , डाक्टर राम मनोहर लोहिया,लोकनायक जयप्रकाश और कर्पूरी ठाकुर के समाजवाद को फिर से धरातल पर उतारने के विचारों से लबरेज प्रशांत किशोर नयी राजनीतिक व्यवस्था को जमीन पर उतारने चल पड़ा है। समाज के मंथन से सही सोंच वाले सही लोगों की तलाश कर उन्हें एक मंच प्रदान करना और उनके सामूहिक प्रयास से सत्ता परिवर्तन कर व्यवस्था बदलने का यह अभियान पिछले साल दो अक्तूबर 2022 से चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम से शुरू हुआ था जो पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, गोपालगंज, सीवान, छपरा, वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर होते हुए सीतामढ़ी जिले में जारी है। इस बाबत पूछे जाने पर मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार ठाकुर बताते हैं कि यह जन जागरण का अभियान अब रंग पकड़ने लगा है और वह दिन दूर नहीं जब बिहार की जमीन से राजद-जदयू- कांग्रेस और भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा तथा प्रशांत किशोर की सोंच का जन सुराज स्थापित हो सकेगा।








