छपरा से हमारे उप-संपादक की कलम :
माह-ऐ-रमजान के अंतिम जुमा (जुमातुल विदा) की नमाज शुक्रवार को सारण जिले जिले के नगर पंचायत एकमा बाजार सहित तमाम जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गयी
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
एकमा, (के.के.सिंह ‘सेंगर’)। माह-ऐ-रमजान के अंतिम जुमा (जुमातुल विदा) की नमाज शुक्रवार को सारण जिले जिले के नगर पंचायत एकमा बाजार सहित तमाम जामा मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गयी।

इस दौरान रोजेदारों ने जुमा की दो रेकत फर्ज अदा करने के साथ ही हर खास-व-आम के हक में दुआ किया और मुल्क की तरक्की और अमन चैन की दुआएं मांगी। एकमा जामा मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद बाहर निकलने के बाद रोजेदार परवेज अख्तर ने बताया कि अलविदा की नमाज के दौरान अलविदा-अलविदा की सदाओं से रोजेदारों की आँखें नम हो गयीं और रमजान के जाने का गम तमाम रोजेदारों पर साफ तौर से नजर आने लगा।

जमातुल विदा में नमाज़ियों की भीड़ को देखते हुए मस्जिद के इंतेजामिया ने जानेमाज, चटाई, दरी, टेंट आदि की विशेष व्यवस्था की गई। बावजूद इसके मस्जिदों में नमाजियों के लिए जगह की कमी महसूस की गयी। पहली अजान के साथ ही मस्जिदों में रोजेदारों के आने का सिलसिला शुरू हुआ और नमाज के पहले तक जारी रहा। एकमा प्रखंड के रामपुर, कर्णपुरा, आमडाढ़ी, परसागढ़ नया टोला, छित्रवलिया, रसूलपुर, चनचौरा, योगियां, जमनपुरा, असहनी, बनवारी अमनौर, चमकीला, फुचटी खुर्द, बनकट, कोहड़गढ़, साधपुर, इमादपुर आदि तमाम मस्जिदों के इमाम व खतीब ने रमजान की फजीलत और इस की अहमियत बयान किया और लोगों को रमजान के बाद भी परहेज और नमाजों की पाबन्दी करने की तलकीन की। इस मौके पर एकमा जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इकबाल ने कहा कि रमजान माह इंसान को परहेजगार और मुत्तकी बनाता है। जुमातुल विदा भी आम जुमा की तरह है इसका भी सवाब दीगर जुमा की तरह ही है। लेकिन ये जुमा रमजान के आखरी अशरे में होता है. इसलिए इसकी अहमियत बढ़ जाती है। जामा मस्जिद एकमा में नमाज अदा करने के बाद रोजेदार अहमद अली नेताजी, जावेद अहमद, साहेब हुसैन, साकिर हुसैन, शाहिद हुसैन, परवेज अख्तर, जाकिर हुसैन, तबारक हुसैन, राजाबाबू, सैयद अंसारी, नसीम अंसारी, पिंकू अहमद आदि ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि नेकी बटोरने के महीने के गुजरने पर नेक बंदों को दु:ख हो रहा है।








