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Post: ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण में चमका चंपारण का गौरव

ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण में चमका चंपारण का गौरव

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :

पंडित राजकुमार शुक्ल की ऐतिहासिक डायरी का दस्तावेजकरण, प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन अभियान को मिली रफ्तार

सतवरिया स्थित पैतृक आवास पर हुआ सर्वेक्षण

संस्कृति संरक्षण की दिशा में प्रशासन की बड़ी पहल

आमजन से भी विरासत साझा करने की अपील

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण’ अभियान के तहत चंपारण के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

फोटो : मोहन सिंह

चंपारण सत्याग्रह के सूत्रधार पंडित राजकुमार शुक्ल के पैतृक आवास सतवरिया में उनकी हस्तलिखित ऐतिहासिक डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार ने स्वयं मौके पर पहुंचकर डायरी का सूक्ष्म अवलोकन किया। यह डायरी स्वतंत्रता संग्राम के अनछुए पहलुओं को उजागर करने के साथ-साथ महात्मा गांधी और पंडित शुक्ल के गहरे संबंधों की सजीव झलक प्रस्तुत करती है।

अमूल्य धरोहर

सर्वेक्षण के दौरान पंडित शुक्ल के पौत्र भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस पहल को आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में सराहनीय कदम बताया। राकेश कुमार ने कहा कि यह डायरी ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत मूल्यवान है और इसके संरक्षण से शोधकर्ताओं एवं इतिहास प्रेमियों को चंपारण आंदोलन की जमीनी सच्चाइयों को समझने में नई दिशा मिलेगी।

छाया : अमिट लेख

इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों और विभागीय कर्मियों ने भी पंडित शुक्ल के योगदान को नमन किया। इसी कड़ी में ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन की अध्यक्षता में जिला समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया गया। बैठक में बताया गया कि इस योजना का उद्देश्य आम लोगों के पास सुरक्षित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व की पांडुलिपियों को खोजकर उनका डिजिटाइजेशन करना है, ताकि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित किया जा सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास पूर्वजों द्वारा लिखित कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या पांडुलिपि हो, तो उसे ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से साझा करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों को किसी से लिया नहीं जाएगा, बल्कि केवल उनका डिजिटाइजेशन कर सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही, ऐसी धरोहरों को संरक्षित रखने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की भी योजना है। इस बैठक में जिला समिति के सदस्य डॉ. दिवाकर राय, नसीम अहमद, प्रशांत कुमार, प्रभात कुमार, डॉ. विभाकर दुबे, अंशुमन कुमार, डॉ. राजेश चंदेल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस प्रकार ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के माध्यम से चंपारण की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास अब जमीन पर साकार होता नजर आ रहा है।

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