रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 28 सितम्बर 2026
दोषियों पर हो अपराधिक लापरवाही का मुकदमा : माले
चंपारण तटबंध लंबे समय से जर्जर स्थिति में है जिसके वजह से जनता का वर्षों से लोकप्रिय मांग रहा है कि 70 किलोमीटर लंबे चंपारण तटबंध और पी.डी.रिंग बांध का पक्कीकरण हो तथा नदी की धारा एक किया जाए
किंतु डबल इंजन की स्थायी सरकार इसे लगातार स्थायी रुप से नज़र अंदाज़ कर रही है
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। भाकपा माले नेता व पूर्व जिला पार्षद सुनील कुमार राव ने फुलिया खांड में तटबंध कटाव स्थल से लौटने के बाद बताया कि बगहा के चखनी रजवटिया के समीप, बैरिया प्रखंड के फुलिया खांड पंचायत के फुलिया खांड में तटबंध टुट गया और लौकरिया के धुनिया टोली, मुशहरी टोला,सिंगही घाट,घोड़हिया आदि में कटाव की स्थिति बनी हुई है। यह सर्व विदित है कि चंपारण तटबंध लंबे समय से जर्जर स्थिति में है जिसके वजह से जनता का वर्षों से लोकप्रिय मांग रहा है कि 70 किलोमीटर लंबे चंपारण तटबंध और पी.डी.रिंग बांध का पक्कीकरण हो तथा नदी की धारा एक किया जाए। किंतु डबल इंजन की स्थायी सरकार इसे लगातार स्थायी रुप से नज़र अंदाज़ कर रही है। इसके पीछे की राजनीति भ्रष्टाचार है। बताया जाता है कि चंपारण तटबंध रैट होल,रैन कट, की वजह से जर्जर हो गया है। इसके मरम्मत,देख देख, रेनकट आदि के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों करोड़ रूपए जल निस्सरण प्रमंडल के पदाधिकारियों, सांसद, विधायक के चहेते संवेदकों द्वारा बोरी भर,रेन कट,बचाव कार्य आदि के नाम पर डकार लिए जाते हैं। इसलिए यहां के सत्ताधारी जनप्रतिनिधि नहीं चाहते हैं कि बाढ़ कटाव का स्थायी निदान हो।पश्चिम चंपारण का चंपारण तटबंध फुलिया खांड में ध्वस्त होना इसी का परिणाम है। तटबंध टुटने से आधा दर्जन से अधिक पंचायतों के दर्जनों गांवों के हजारों की आबादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। हजारों एकड़ खेतों में लगे फसलें बर्बाद हो गई है। आश्चर्य की बात है कि जब भी चंपारण तटबंध से संबंधित बातें जनप्रतिनिधियों और जल निस्सरण प्रमंडल के पदाधिकारियों से होती है तो कहते हैं कि सब कुछ ठीक-ठाक है। कुछ भी नहीं होगा। जिला प्रशासन भी कहता है कि बचाव और देख भाल का पुख्ता इंतजाम है। कहीं कुछ भी दिक्कत नहीं है।दो दिनों पहले तक कहा गया है ऑल इज़ वेल फिर आधी रात में कटाव क्यों? कटाव के जिम्मेवार जल निस्सरण प्रमंडल के पदाधिकारियों, संवेदकों पर घोर लापरवाही के लिए मुकदमा दर्ज हो ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं हो। साथ ही बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुहिक किचन और एक किवंटल अनाज प्रति सप्ताह,20 हज़ार रुपए,व मवेशियों के लिए चारा का इंतजाम हो तथा बाढ़ से बर्बाद फसलों का मुआवजा दे सरकार।








