रिपोर्ट : बगहा डेस्क, 06 अक्टूबर 2026
चंदन की गुणवत्ता सपोर्टिंग पौधे से निखरती है
सफेद चंदन और काली हल्दी की खेती में जुटे पूर्व सहायक कमांडेंट उत्कृष्ट पांडे
उत्तर भारत में लगभग विलुप्त हो चुके सफेद चंदन को फिर से दे रहे पहचान : उत्कृष्ट पांडे
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बगहा/वाल्मीकिनगर, (जगमोहन काजी)। कभी सेवा सुरक्षा और बंधुत्व का पाठ पढ़ाते थे, सशस्त्र सीमा बल 21 वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट कहलाते थे। उत्कृष्ट पांडे – जिनका मन अधिकारी के रूप में नहीं लगा, उनकी किस्मत को तो कहीं और जाना मंजूर था।

कहते हैं पौरुष अपना पथ स्वयं गढ़ता है। वे कहते हैं जो पानी से नहाता है वो लिबास बदलता है और जो पसीने से नहाता है वह इतिहास बदलता है । कुछ वर्षों की सेवा करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा को अलविदा कह दिया। वे अपनी जन्म भूमि पर जाकर चंदन की खेती करने लगे और अपने भविष्य की योजनाओं को यथार्थ की धरातल पर उतारने में जुट गए। श्री पांडे ग्रामीणों को जगाने लगे और देखते- ही देखते कुछ वर्षों में किसानों को भी स्वावलंबी बनाने लगे। जब किसानों की आमदनी बढ़ने लगी तो उनके हौसले बुलंद हो गए।

उनका कहना है चंदन और काली हल्दी की खेती अत्यधिक लाभकारी है।वर्तमान समय में सफेद चंदन का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। औषधीय गुणवाले चंदन के पौधों की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा वे कई बार सम्मानित भी हो चुके हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित 10 एकड़ क्षेत्र के फार्म हाउस में चंदन, काली हल्दी आदि कई औषधीय गुण वाले पौधों की खेती करके अच्छी कमाई के साथ-साथ राज्य के किसानों को भी जागरूक कर रहे हैं । दूरभाष पर स्वरांजलि सेवा संस्थान के संस्थापक डी. आनंद से उनकी बातचीत हुई। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भी चंदन की खेती की जा सकती है और किसान स्वावलंबी हो सकते हैं। आने वाले समय में स्वरांजलि सेवा संस्थान के मैनेजिंग डायरेक्टर सह समाजसेवी संगीत आनंद, चंदन की खेती के गुर सीखने प्रतापगढ़ जाएंगे। गंडक नदी के तट पर आयोजित 06 नवंबर 2014 को पहली नारायणी गंडकी महा आरती में सहायक कमांडेंट उत्कृष्ट पांडे, पूर्व मंत्री विनय बिहारी द्वारा नारायणी गंडकी सम्मान से सम्मानित किए गए थे। ऋषिग्राम ऑर्गेनिक्स के संस्थापक उत्कृष्ट पांडे का कहना है – गांव को समृद्ध बनाने के लिए हमें अपनी मिट्टी, पानी, हवा और पारंपरिक ज्ञान को बचाना होगा और किसान को केवल उत्पादक नहीं बल्कि प्रकृति का संरक्षक भी बनाना होगा। ई-कॉमर्स के माध्यम सेआम लोगों एवं किसानों को सफेद चंदन के पौधे भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

वाल्मीकि नगर क्षेत्र में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में अपने सेवाकाल के दौरान श्री पांडे ने कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कार्य किया। कृषि एवं पर्यावरण कार्यों को विभिन्न स्तरों पर पहचान मिली। उन्हें तरु मित्र सम्मान, देव भूमि बागवानी पुरस्कार, और कृषि वानिकी किसान पुरस्कार जैसे कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।15 साल के बाद एक सफेद चंदन के पेड़ की कीमत करीब 70000 से ₹200000 तक हो जाती है।अगर कोई व्यक्ति 50 पेड़ लगाता है तो 15 साल बाद उसकी कीमत एक करोड़ की हो जाती है।कुछ नया करने की चाह में सशस्त्र सीमा बल 21 वीं वाहिनी के पूर्व असिस्टेंट कमांडेंट उत्कृष्ट पांडे ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। उन्होंने वर्ष 2018 से सफेद चंदन की खेती शुरू की।चंदन की खुशबू सालो साल बढ़ती ही जा रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम. ए करके उत्कृष्ट ने यूपीएससी की परीक्षा पास की ,और वर्ष 2011 में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चंपारण के वाल्मीकि नगर में तैनात हुए । आखिरी तैनाती बिहार के सुपौल जिले के बीरपुर में रही। उत्कृष्ट ने दो हेक्टेयर में 250 पौधों से चंदन की खेती शुरू करके अपने सपनों को नया रूप दिया। नर्सरी में एक पौधे की कीमत लगभग ₹100 से लेकर ₹150 रुपए तक होती है। चंदन के पौधों को कम पानी की जरूरत होती है। कृषि वानिकी के लिए यह एक अनुकूल पौधा है। उत्तर भारत में लगभग विलुप्त हो चुके सफेद चंदन को फिर से पहचान देने में लगे हैं उत्कृष्ट पांडे। इसकी गुणवत्ता सपोर्टिंग पौधे से ही निखरती है।








