रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 08 अक्टूबर 2026
आरोप : मजदूरों की वास्तविक और जमीनी समस्या से इतर नौकरशाह अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से फैसले लिये जाते है, जिसके कारण लगातार मजदूरों की समस्या बढ़ती जा रही है
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। ऑल इंडिया सेन्ट्रल काउंसिल से संबद्ध बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन पश्चिम चंपारण द्वारा श्रम अधीक्षक पश्चिम चंपारण, बेतिया के कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान जिला संयोजक जवाहर प्रसाद ने कहा बिहार भवन एवम् अन्य सं निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में लंबे समय से मजदूरों के प्रतिनिधि नहीं है। मजदूरों की वास्तविक और जमीनी समस्या से इतर नौकरशाह अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से फैसले लिये जाते है। जिसके कारण लगातार मजदूरों की समस्या बढ़ती जा रही है । निबंधन और सामाजिक सुरक्षा प्राप्त करने कि नियमो में अधिकार अधिकारियों की एकतरफा और मनमाना बदलाव निराशाजनक हैं।ऑनलाइन और अपडेट के नाम पर लगातार मजदूरो को परेशान किया जा रहा है।

निबंधन और सामाजिक सुरक्षा के लिए ज्यादातर मजदूरों को महीनों लेबर आफिस पर चक्कर लगवाया जाता है। जाँच के नाम पर निचले स्तर के अधिकारी मनमानी करते है। मजदूरों के निबंधन और सामाजिक सुरक्षा में धांधली और भ्रष्टाचार चरम पर है। कल्याण बोर्डो का हाथ निर्माण श्रमिकों के साथ एक मजाक प्रतीत होता हैं। निर्माण मजदूर यूनियन के बैरिया प्रखंड के संयोजक जोखू चौधरी ने कहा बिहार भवन एवम् निर्माण कर्मकार बोर्ड का फिर से गठन किया जाय और इसमे नियमानुसार मजदूर प्रतीनिधियो की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। बोर्ड की नियमित बैठक हो और मजदूरों के लिए सभी फैसले बोर्ड द्वारा लिए जाएं। मजदूर नेता रविंदर राम ने कहा निर्माण मजदूरों के निबंधन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाय। पूर्व में मैनुअली निबंधित सभी श्रमिकों के निबंधन को ऑन लाइन किया जाय और ऑनलाइन करने की पूरी व्यवस्था श्रम कार्यालय करे। निर्माण मजदूर नेता हेम नारायण शर्मा ने कहा सामाजिक सुरक्षा लाभ के लिए आवेदन करने की समय सीमा खत्म किया जाय। निबंधित मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा से सम्बन्धित भुगतान की गारंटी की जाय। समय सीमा पोर्टल अपडेट आदि का बहाना कर मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा से बंचित करने की साजिश बंद की जाय। सुशीला देवी ने कहा निर्माण मजदूरों का एक वर्ष से बंद वृद्धा पेंशन जल्द चालू किया जाय,तथा २०२० के बाद से मजदूरों का वार्षिक चिकित्सा हेतु ३००० रुपये प्रति वर्ष मिलना बंद है ,उसे फिर से देना शुरू किया जाय।कार्यक्रम में नबी हसन मियां,चंदन राम, कैलाश चौधरी,अशोक मुखिया, सुगन्धि देवी, ग्यानती देवी,रामेश्वर यादव , बच्चु राम, रामबाबू राम,अर्जुन राम अंजू देवी सीमा देवी ने अपनी अपनी बात रखे,कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की भागीदारी रही।








