रिपोर्ट : छपरा डेस्क, 13 अक्टूबर 2026
सिद्धांतवादी और ईमानदार गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता थे विजय बाबू
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (सारण)/सासाराम, (रोहतास)। बिहार प्रदेश लोक समिति के तत्वावधान में मंगलवार को सासाराम में गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता स्व. विजय कुमार उर्फ विजय बाबू की छठी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाहाबाद प्रक्षेत्र के अध्यक्ष, गांधीवादी किसान नेता एवं अवकाश प्राप्त शिक्षक सुरेश प्रसाद ने की। इस दौरान लोक समिति के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने विजय बाबू के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए कार्यों को याद किया। इस अवसर पर बिहार प्रदेश लोक समिति के प्रांतीय महामंत्री शिवजी सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि स्व. विजय बाबू सारण जिले के जाने-माने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनकी पहचान एक सिद्धांतवादी, ईमानदार और अनुशासनप्रिय कार्यकर्ता के रूप में थी। वे स्वभाव से सरल एवं मृदुभाषी थे, लेकिन सिद्धांतों और संगठनात्मक अनुशासन के मामले में दृढ़ रहते थे। श्री सिंह ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2010 में लोक समिति की सक्रिय सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने रोहतास जिले में संगठन के लिए काम करना शुरू किया। बाद में गया जिले के सिलौंजा में आयोजित सम्मेलन में विजय कुमार उर्फ विजय बाबू को बिहार प्रदेश का अध्यक्ष तथा उन्हें प्रांतीय महामंत्री बनाया गया। इसके बाद संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता और बढ़ गई। उन्होंने बताया कि प्रांतीय महामंत्री का पदभार संभालने के बाद उनका पहला दौरा सारण जिले के जलालपुर स्थित गांधी सेवा आश्रम का था। दिसंबर महीने की कड़ाके की ठंड में वे देर शाम पटना के मीठापुर से बस पकड़कर तड़के करीब तीन-चार बजे जलालपुर चौक पहुंचे थे। उस समय चारों ओर अंधेरा था। उन्होंने विजय बाबू को फोन किया तो उन्होंने बताया कि वे भी उसी चौक पर उनके आने का इंतजार कर रहे हैं। श्री सिंह के अनुसार, विजय बाबू ने ठंड से राहत दिलाने के लिए पुआल की व्यवस्था कर अलाव जलाया और उन्हें गर्माहट दी। उन्होंने बताया कि अभी रात बाकी है और दुकानें खुलने के बाद चाय पीकर आश्रम चलेंगे। बस के पहुंचने का समय पहले से मालूम होने के कारण विजय बाबू वहां मौजूद थे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह प्रसंग विजय बाबू की आत्मीयता, संवेदनशीलता और कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पण को दर्शाता है। शिवजी सिंह ने कहा कि विजय बाबू ने उनकी सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण को देखकर राष्ट्रीय अध्यक्ष गिरिजा सतीश से उनकी प्रशंसा की थी। उन्होंने विजय बाबू को समय का पाबंद, अनुशासनप्रिय और संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि विजय बाबू शिक्षा के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील थे। गरीब किसानों, मजदूरों, शोषितों, पीड़ितों और वंचित समुदायों के हितों के लिए उन्होंने लगातार काम किया। गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने जलालपुर में गांधी सेवा आश्रम की स्थापना की। आश्रम में योग्य शिक्षकों के माध्यम से कम शुल्क पर बच्चों को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। श्री सिंह ने बताया कि विजय बाबू के निधन के बाद उनके इकलौते पुत्र नागेंद्र कुमार सिंह आश्रम के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांधी सेवा आश्रम के माध्यम से विजय बाबू ने सारण जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया। वे बिहार रिलीफ कमेटी के प्रांतीय अध्यक्ष भी रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने सारण जिले में भूदान के माध्यम से गरीब भूमिहीनों को जमीन दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इन कार्यों के लिए स्थानीय लोग आज भी उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं। उन्होंने कहा कि विजय बाबू संगठन के विस्तार, कोष की व्यवस्था, कार्यालय संचालन और सदस्यता अभियान पर विशेष ध्यान देते थे। उनके सानिध्य में रहकर उन्हें बहुत कुछ सीखने और उनके गुणों को आत्मसात करने का अवसर मिला, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल सकते।
श्रद्धांजलि सभा में भानुप्रकाश, आशुतोष कुमार, डॉ. विकास कुमार शर्मा, मथुरा सिंह, कासिम अंसारी, धर्मशीला देवी, काशीनाथ सिंह, वशिष्ठ पासवान, किसान नेता रविंद्र कुमार सिंह, भोलानाथ सिंह सहित अन्य गणमान्य लोगों ने भी विजय बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।








