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Post: अनुमंडलीय अस्पताल में भारी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है

अनुमंडलीय अस्पताल में भारी लापरवाही का मामला प्रकाश में आया है

जिला ब्यूरो संतोष कुमार की रिपोर्ट : 

कूड़े के ढेर में फेंकी गई लाखों रुपये की जीवनरक्षक एक्सपायर दवाएं

न्यूज डेस्क, सुपौल

जिला ब्यूरो संतोष कुमार

– अमिट लेख 

सुपौल (ब्यूरो डेस्क ): जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में हमेशा दवाओं की कमी का रोना-रोने वाले अनुमंडलीय अस्पताल के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से लाखों की दवाएं एक्सपायर हो गई। और कचरे के ढेर में फेंक दी गई। एक्सपायर दवा अनुमंडलीय अस्पताल परिसर में एएनएम छात्रावास बिल्डिंग के एक रुम में कचरा में मिलीं है। इतना ही नहीं साक्ष्य छुपाने के लिए अधिकांश जीवनरक्षक दवाओं को पोखर के इर्द गिर्द कचरें में फेंक दिया है। मामला सामने आने के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में आ गई है। दरअसल, सुशासन की सरकार में स्वास्थ्य विभाग की प्रगति के लाखों दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। जबकि सिविल सर्जन ललन ठाकुर का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है। अभी वो त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के तरफ से लौटे है। हालांकि वह कह रहे हैं कि इसकी जानकारी अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक से ले लीजिए कि दवाई कहा पर फेंका गया है। एएनएम छात्रावास की बिल्डिंग में कचरे की तरह डंप की गई लाखों रुपये की जीवनरक्षक एक्सपायर दवाओं में कई दवाएं कीमती और जीवन रक्षक हैं।

दवाएं साल 2022, 2023 और 2024 के अलग-अलग महीने में एक्सपायर हुई हैं। इसमें भारी मात्रा में प्रेग्नेंसी किट,एचआइवी किट, वीसीजी डिस्पोजल,ओआरएस घोल और आइएस पेक बॉक्स है जबकि भारी मात्रा डिस्पोजल को आगामी नवंबर माह में एक्सपायर होना है। विदित हो कि सरकार लाखों रुपये की इन दवाओं को जरूरतमंदों को देने के लिए भेजती है, लेकिन यहां उन्हें देने की जगह इसे कचरे में फेंक दिया गया। केंद्र और राज्य सरकारें लाखों रुपये खर्च कर इन दवाओं को जिला अनुमंडल और प्रखंडों में इसलिए भेजती है, जिससे गरीब लाचार और जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके। लेकिन इन कीमती दवाओं को कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है। नियम के अनुसार, अगर सरकारी अस्पतालों की दवाएं एक्सपायर या खराब हो जाती है तो ऐसी स्थिति में अस्पताल कर्मियों को इसकी सूचना जिला मुख्यालय और सिविल सर्जन को देनी होती है। इसके बाद सर्जन के आदेश के बाद इन दवाओं को नष्ट किया जाता है लेकिन यहां मामला अलग ही है। वहीं बताया जा रहा है कि मरीजों को अस्पताल से दवा देने की जगह उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल के इर्द-गिर्द के मेडिकल शॉप का रास्ता दिखा दिया जाता है।

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