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Post: खतरे के निशान पर बिहार की पांच नदिया, कोशी बराज के 56 फाटक खुले

खतरे के निशान पर बिहार की पांच नदिया, कोशी बराज के 56 फाटक खुले

विशेष ब्यूरो बिहार दिवाकर पाण्डेय की रिपोर्ट :

राज्य में पिछले 24 घंटों में औसत 23.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। 17 जिलों में झमाझम बारिश हुई है
न्यूज डेस्क, राजधानी बिहार

दिवाकर पाण्डेय

– अमिट लेख
पटना, (ए.एल.न्यूज़)। नेपाल और बिहार में बारिश से उत्तर बिहार की नदियां पूरे उफान पर हैं और पांच नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। राज्य में पिछले 24 घंटों में औसत 23.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। 17 जिलों में झमाझम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को चंपारण और आसपास के क्षेत्रों के अलावा नेपाल की तराई वाले इलाकों से सटे जिलों में भारी बारिश हुआ हैं। मंगलवार को दरभंगा, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और किशनगंज में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक, गंडक, कोसी, बागमती, कमला बलान और महानंदा कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर बराज से 4.40 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद गंडक का पानी दियारा क्षेत्र के गांवों में घुस गया है। बैरिया की बैजुआ पंचायत समेत अन्य गांवों के लोग पलायन करने लगे हैं। बैजुआ के आठ व सूर्यपुर के एक स्कूल को शिक्षा विभाग ने अगले आदेश तक बंद कर दिया है। सिकटा नदी में उफान से त्रिवेणी नहर का तटबंध 9 किमी में तीन जगहों पर टूट गया है। उधर, कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से सुपौल, मधेपुरा और सहरसा जिले में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। मधेपुरा में आलमनगर तो सहरसा में सलखुआ के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। खगड़िया जिले में कोसी और बागमती के जलस्तर में उतार चढ़ाव से कटाव तेज हो गया है। कटिहार जिले में महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग वीरपुर के मुख्य अभियंता ई वरुण कुमार ने बताया कि कोसी बराज के सभी 56 फाटक खोल दिए गए है। खगड़िया जिले में कोसी व बागमती नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। अररिया जिले के सिकटी प्रखंड क्षेत्र होकर बहने वाली नूना नदी में पानी बढ़ने से सिंघिया गांव के फरमान अली टोला में नूना नदी का सिंघिया तटबंध ध्वस्त हो गया है। इस बीच, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि अधिक बारिश के कारण गंडक और कोशी नदियों में पानी का बहाव सामान्य से काफी अधिक हो गया है। इसके कारण पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सुपौल में तटबंधों पर दबाव बना, पर सभी तटबंध सुरक्षित हैं।

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