बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
यदि जिला प्रशासन अब भी चुप रहा, तो यह सबसे बड़ी रोजगार योजना सिर्फ कागजों की योजना बनकर रह जाएगी
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पश्चिमी चंपारण, (अमित तिवारी)। विशेष रिपोर्ट
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत एक विशाल घोटाले का खुलासा हुआ है।

विशेष जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि धरातल पर कार्य नगण्य हैं, लेकिन कागजों पर लाखो की बंदरबांट जारी है। “सीरिसया और सरगटिआ” पंचायत सबसे बड़े घोटाले की गवाह बनती प्रतीत हो रही?
जमीनी पड़ताल में पता चला है कि सिकटा प्रखंड की कई पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में भारी पैमाने पर फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन की लूट की जा रही है। उदाहरण के लिए सिरिसीया पंचायत के कार्य कोड कि बात करे : 0512010/एफपी/20412280

मस्टर रोल : 219
कार्य का नाम : गोबर्धन सोनार के खेत से मुरलीधर के खेत तक बांध मरम्मती कार्य।
दूसरा योजना का कार्य कोड : Work Code : 0512010/ एफपी/20412279, मस्टर रोल : 225
कार्य का नाम : जीवाजी के खेत से जवाहिर साह के खेत तक बांध मरम्मती कार्य।
सरगटिआ पंचायत कार्य कोड :
0512010011/एफपी/20409504 मस्टर रोल : 43
कार्य का नाम : ग्राम सुन्दरगवा मे ब्रिजेश सिंह के खेत से सरल साह के बगीचा तक बांध मरम्मती कार्य
सूत्रों के हवाले सिर्फ 15 दिन में लाखो की लूट…!
जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं..?
फर्जी कार्य का फर्जी मजदूरों की संख्या – 488

NMMS ऐप बना घोटाले का डिजिटल हथियार…!
जहाँ सरकार तकनीक के सहारे पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रही है, वहीं भ्रष्टाचारी उसी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप पर बिना कार्य कराए मजदूरों की हाजिरी फोटो खींचकर अपलोड की जा रही है — वो भी बिना काम कराए! फोटो तो असली है, पर कार्य पूरी तरह से फर्जी।
रोजगार सेवक और अधिकारी चुप क्यों हैं…?
जब हमारी न्यूज़ एजेंसी की टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो न तो कार्य स्थल पर मजदूर थे, और न ही कोई कार्य हो रहा था। क्या यह सब कुछ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार सेवकों की मिलीभगत का नतीजा है?
अब और चुप्पी नहीं, जांच होनी चाहिए..!
1. सिकटा प्रखंड इन पंचायतो का मनरेगा के तहत हुए कार्यों का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए।
2. जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता फर्जी हाजिरी में पाई जाए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
3. NMMS ऐप के डेटा की एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए।
गरीबों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वालों को अब बख्शा नहीं जाना चाहिए। यदि जिला प्रशासन अब भी चुप रहा, तो यह सबसे बड़ी रोजगार योजना सिर्फ कागजों की योजना बनकर रह जाएगी।








