संकलन : छपरा से उप-संपादक
किडनी के मरीजों को अब गांव में ही मिलेगी जिंदगी की डोर :
• सदर अस्पताल में पूर्व से संचालित है 20 बेड का डायलिसिस सर्विस
• अब किडनी के मरीजों को निजी अस्पताल या दूसरे शहर जाने की जरूरत नहीं
• बीपीपीएल कार्डधारियों का मुफ्त में होता है डायलिसिस
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख, संवाददाता
छपरा, (सारण)। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराना जीवन की अनिवार्य जरूरत होती है। लेकिन ग्रामीण इलाकों के मरीजों के लिए अब तक यह इलाज किसी चुनौती से कम नहीं था। डायलिसिस कराने के लिए उन्हें बार-बार छपरा सदर अस्पताल, पटना या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की भारी बर्बादी होती थी।

कई परिवार तो आर्थिक तंगी के कारण समय पर इलाज भी नहीं करा पाते थे। अब यह तस्वीर बदल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण मरीजों की इस सबसे बड़ी समस्या का समाधान करते हुए मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में पांच बेड और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में तीन बेड की डायलिसिस सेवा शुरू कर दी है। इसके साथ ही जिले में अब सदर अस्पताल सहित तीन सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो गई है। इस पहल से हजारों किडनी मरीजों को अपने घर के नजदीक ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। सबसे बड़ी राहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिली है, जिन्हें अब निजी अस्पतालों में हजारों रुपये खर्च करने या दूसरे शहरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
ग्रामीण मरीजों की सबसे बड़ी परेशानी हुई दूर
किडनी रोगियों के लिए नियमित डायलिसिस बेहद जरूरी होती है। पहले मढ़ौरा, तरैया, मशरक, पानापुर, अमनौर, इसुआपुर, सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा और नयागांव जैसे क्षेत्रों के मरीजों को इलाज के लिए कई किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी।

अब मढ़ौरा और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में सेवा शुरू होने से मरीजों का समय, पैसा और शारीरिक परेशानी तीनों कम हो गई है। विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों और उनके परिजनों को इसका सबसे अधिक लाभ मिल रहा है।
बिहार का पहला अनुमंडलीय अस्पताल बना था मढ़ौरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अनुमंडलीय स्तर पर बिहार में सबसे पहले मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में ही डायलिसिस सेवा शुरू की गई थी। यह सेवा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित की जा रही है, ताकि मरीजों को आधुनिक मशीनों और प्रशिक्षित तकनीशियनों के माध्यम से बेहतर इलाज मिल सके।
सदर अस्पताल में हर महीने 1500 से अधिक डायलिसिस सेशन
छपरा सदर अस्पताल में पहले से 20 बेड का आधुनिक डायलिसिस यूनिट संचालित हो रहा है। अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि यहां प्रत्येक माह करीब 170 मरीजों का लगभग 1500 डायलिसिस सेशन किया जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर बीपीएल कार्डधारियों को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।

जिन मरीजों के पास बीपीएल कार्ड नहीं है, उनके लिए भी सरकारी दर पर मात्र 1784 रुपये प्रति डायलिसिस में इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि निजी अस्पतालों में इसके लिए कई गुना अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है।
हर महीने सैकड़ों मरीज उठा रहे लाभ
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविन्द कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 170 मरीजों के 1500 डायलिसिस सेशन किए जाते हैं। मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में करीब 35 मरीजों के 242 डायलिसिस सेशन होते हैं। सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में हर महीने 10 मरीजों के 72 डायलिसिस सेशन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस बेड की संख्या बढ़ाने की भी योजना है।
आर्थिक बोझ भी हुआ कम
किडनी की बीमारी का इलाज लंबे समय तक चलता है। ऐसे में नियमित डायलिसिस पर हर महीने हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त अथवा बेहद कम शुल्क पर उपलब्ध यह सुविधा गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी राहत से कम नहीं है। अब मरीजों को यात्रा, रहने और निजी अस्पतालों के भारी खर्च से भी मुक्ति मिल रही है।
लाभार्थी बोले अब पटना जाने की मजबूरी खत्म :
सदर अस्पताल में पिछले कई महीने से डायलिसिस सेवा का लाभ ले रहे मरीज मुमताज अंसारी ने बताया कि पहले हर डायलिसिस के लिए पटना जाना पड़ता था। आने-जाने में पूरा दिन और काफी पैसा खर्च हो जाता था। अब सरकारी अस्पताल में अच्छी सुविधा मिल रही है। इलाज समय पर हो रहा है और आर्थिक बोझ भी काफी कम हो गया है।
सरकारी सुविधा ने परिवार की चिंता कम कर दी
सदर प्रखंड के डोरीगंज निवासी मुकेश कुमार ने कहा कि मेरे पिता के लिए बार-बार निजी अस्पताल में इलाज कराना संभव नहीं था। सदर अस्पताल में नियमित डायलिसिस की सुविधा मिलने से काफी राहत मिली है। अगर यह सुविधा अनुमंडलीय अस्पतालों में भी बढ़ेगी तो ग्रामीण मरीजों को और अधिक लाभ मिलेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला कार्यक्रम प्रबंधक अरविन्द कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य प्रत्येक जरूरतमंद मरीज तक गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवा पहुंचाना है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए भविष्य में अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट का विस्तार और बेड क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़े।
बॉक्स : एक नजर में
• सदर अस्पताल में 20 बेड की डायलिसिस सेवा
• मढ़ौरा अनुमंडलीय अस्पताल में 5 बेड
• सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में 3 बेड
• बीपीएल कार्डधारियों को निःशुल्क डायलिसिस
• अन्य मरीजों के लिए मात्र ₹1784 प्रति सेशन
• सदर अस्पताल में हर माह 170 मरीजों के लगभग 1500 डायलिसिस सेशन
• मढ़ौरा में 35 मरीजों के 242 सेशन
• सोनपुर में 10 मरीजों के 72 सेशन
• भविष्य में अनुमंडलीय अस्पतालों में बेड बढ़ाने की तैयारी








