रिपोट : विशेष ब्यूरो, पटना
सड़क टूटने के बाद ग्रामीणों ने आवागमन बहाल रखने के लिए उसके ऊपर बांस की चचरी डाल दी
कांटा गांव में चचरी टूटी, तेज धार में बहा युवक, बाल-बाल बची जान
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। नेपाल में लगातार हो रही बारिश के बाद बिहार की कई नदियां उफान पर हैं। मुजफ्फरपुर से होकर गुजरने वाली बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से जिले के कई प्रखंडों में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। इस बीच गायघाट प्रखंड के कांटा गांव से सामने आया एक कथित वायरल वीडियो लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। वीडियो में बागमती की तेज धारा के बीच एक व्यक्ति को कुछ स्थानीय लोग खींचकर सुरक्षित बाहर निकालते दिखाई दे रहे हैं। जलस्तर के कारण कांटा गांव की ग्रामीण सड़क पर पानी का भारी दबाव पड़ा, जिसके चलते सड़क का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। सड़क टूटने के बाद ग्रामीणों ने आवागमन बहाल रखने के लिए उसके ऊपर बांस की चचरी डाल दी। यही अस्थायी रास्ता अब ग्रामीणों के लिए आवाजाही का सहारा बना हुआ है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक व्यक्ति इसी बांस की चचरी से होकर सड़क के टूटे हिस्से को पार कर रहा था। इसी दौरान अचानक चचरी टूट गई और वह व्यक्ति बागमती नदी की तेज धारा में जा गिरा।तेज बहाव में व्यक्ति के बहने से मौके पर अफरातफरी मच गई। हालांकि, संयोग से आसपास कुछ स्थानीय लोग मौजूद थे। लोगों ने तत्परता दिखाते हुए नदी की धार में फंसे व्यक्ति को पकड़ लिया और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस तरह उसकी जान बच गई।हालांकि, वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कांटा गांव की स्थिति बाढ़ के दौरान ग्रामीण इलाकों में पैदा होने वाली उस चुनौती को सामने लाती है, जहां सड़क और संपर्क मार्ग टूटने के बाद लोग मजबूरी में अस्थायी साधनों का सहारा लेते हैं। बांस की चचरी ग्रामीणों के लिए रास्ता जरूर बन गई, लेकिन तेज बहाव के बीच यह व्यवस्था कितनी सुरक्षित है, इसका अंदाजा वायरल वीडियो से लगाया जा सकता है।बागमती का जलस्तर बढ़ने के साथ अगर ग्रामीण सड़कें इसी तरह ध्वस्त होती रहीं तो स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से निकलने वाले लोगों के सामने बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। वीडियो ने जिला प्रशासन की बाढ़ तैयारियों और ग्रामीण इलाकों में संपर्क व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब नदी का जलस्तर बढ़ रहा था और सड़क पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा था, तो ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई?घटनाक्रम सही है तो यह महज एक व्यक्ति के बाल-बाल बचने की कहानी नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती का संकेत है।फिलहाल वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन बागमती की तेज धार और टूटे ग्रामीण मार्ग पर बांस की चचरी से आवागमन की तस्वीरें प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ रही हैं बाढ़ के बीच ग्रामीणों की जिंदगी कब तक ऐसे ‘जुगाड़’ के भरोसे चलेगी?








