रिपोर्ट : बगहा डेस्क, 28 सितम्बर 2026
बगहा-2 प्रखंड के अमूमन पंचायतों में बिन खेतिहर लोगों को सदस्य बनाया गया है, जिस कारगुजारी में निर्वतमान पैक्स अध्यक्षों के साथ साथ सहकारिता विभाग से ताल-मेल बैठा चुनावी मुहिम में ताल ठोंकनेवाले किन्ही धनकुबेरों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही
आम किसानों का आरोप फर्जी किसान धनउगाही और कालाबाजारी के जनक हैं..इसपर तत्क्षण रोक लगाने की जरुरत ..?
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
सेमरा बाज़ार, (यादव कमलेश)। आम किसानों के लिए नियोजित पैक्स जैसी जनहितकारी संस्था में सहकारिता विभाग प्रशासनिक पदाधिकारियों की अनदेखी अथवा यूँ कहें कि मिलीभगत से बगहा-2 प्रखंड क्षेत्र के अमूमन पंचायतों में फर्जी मतदाताओं कि बाढ़ सी देखी जा रही है, तों कोई आश्चर्य कि बात नहीं। पैक्स के इस आम चुनाव में किसान सदस्य भागीदार होते हैं जबकि बगहा-2 प्रखंड के अमूमन पंचायतों में बिन खेतिहर लोगों को सदस्य बनाया गया है, जिस कारगुजारी में निर्वतमान पैक्स अध्यक्षों के साथ साथ सहकारिता विभाग से ताल-मेल बैठा चुनावी मुहिम में ताल ठोंकनेवाले किन्ही धनकुबेरों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही। अमिट लेख को जानकारी देते हुए पंचायत सेमरा-कटकुइयां, पैकवलिया-मर्यादपुर, लक्ष्मीपुर-रमपुरवा, वाल्मीकिनगर के दर्जनों किसानॉ ने यह शिकायत की है कि बगैर प्रपत्र जांच के अकेले इन पंचायतों में सैकड़ों की संख्या में फर्जी मतदाता हैं जिनको चुनाव क्रम में उम्मीदवारों से अपनी-अपनी टीम बनाकर वोट के बदले धन वसूल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि चूँकि, यह चुनाव हीं फर्जी तौर तरीकों से अंजाम तक पहुंचाई जाती है, जिसके चलते चुनाव जीतनेवाले लोग मूल किसानों के बजाय फर्जी मतदाता का चोला पहने कागजी किसानों को सरकार की योजना से जुड़े उर्वरक अथवा अनाजों की तयशुदा सप्लाई में अपना कमीशन फिट कर प्रति साल सरकारी योजना को धत्ता बनाने का काम करते हैं और जहाँ से शुरू होता है उर्वरक अथवा किसानों की फसलों के खरीददारी में कालाबाजारी का खेल। स्थानीय विभागीय पदाधिकारियों के इस घिनौने खेल के चलते जहाँ बगहा-2 प्रखंड के वाजिब किसान अपने हक़ ओ अधिकार से महरूम हैं तों वहीँ जन हितकारी योजनाओं में कालाबाजारी के लिए सीधे लोग-बाग़ सरकार को जिम्मेवार बना देते हैं। हालाँकि, पैक्स चुनाव की मतदान तिथि गिनती के शेष हैं लिहाजा, सेमरा-कटकुइया के आम किसान यदि इस आशय पर कार्यवाई नहीं होती तों फर्जी मतदाता के बूते किसानों के हक़ और हकूक को निगलने वाली इस अंधेर प्रक्रिया को सक्षम न्यायालय में चुनौती देंगे।







