रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 28 सितम्बर 2026
अधिवक्ता का आरोप : बिना अनुमति जमीन पर कराया जा रहा निर्माण, दरवाजा बंद करने की कोशिश
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (ए.एल.न्यूज़)। बेतिया के पुरानी गुदरी इलाके में करीब 70 साल पुराने मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। विवाद मंदिर निर्माण से ज्यादा, रास्ते और दरवाजे को लेकर है।

मामले में हाईकोर्ट की अधिवक्ता स्वाति बरनवाल ने बेतिया एसपी को आवेदन देकर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। स्वाति बरनवाल के आवेदन के अनुसार, खेसरा नंबर 1966 की जमीन उनके दादाजी की है और इसी जमीन पर उनके दादाजी ने करीब 70 वर्ष पहले मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में परिवार के लोग पूजा-पाठ के लिए जा सकें, इसके लिए उनके घर की तरफ से एक दरवाजा भी खोला गया था। मंदिर में आने-जाने के लिए सड़क की तरफ से भी रास्ता मौजूद है, जहां से मोहल्ले के अन्य लोग पूजा-पाठ के लिए आते-जाते हैं। लेकिन मंदिर काफी पुराना होने के कारण अब कुछ लोगों द्वारा पुराने मंदिर को तोड़कर नए मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। स्वाति बरनवाल का आरोप है कि उनकी अनुमति और सहमति के बिना उनकी जमीन पर मंदिर निर्माण का कार्य कराया जा रहा है।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ दिनों से सुरेश महतो और अन्य लोगों द्वारा मंदिर निर्माण के नाम पर जबरन दरवाजा बंद करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण का बहाना बनाकर उनके घर से मंदिर की ओर जाने वाले पुराने रास्ते को बंद किया जा रहा है। स्वाति बरनवाल ने बताया कि उनकी करीब 70 वर्षीय मां घर पर अकेली रहती हैं और मंदिर में पूजा-पाठ के लिए आने-जाने का यही रास्ता उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है। रास्ता बंद होने से उनकी मां को भी आने-जाने में परेशानी होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस घर के परिवार के लिए करीब 70 साल से मंदिर में जाने के लिए दरवाजा बना हुआ है, तो इस दरवाजे को बंद करने की कोशिश क्यों की जा रही है? स्वाति बरनवाल ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है, साथ में यह भी मांग की है किनिर्माण और रास्ते के अधिकार की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि बिना अनुमति निर्माण या जबरन रास्ता बंद करने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई करने के भी मांग की है। फिलहाल मामला एसपी के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन और रास्ते को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है और मंदिर निर्माण के दौरान नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।








