पदयात्रा अभियान का लोगों पर हो रहा गहरा असर, लामबंद हो रहे बिहारी
चार हजार गांवों की पदयात्रा में कहीं नहीं दिखा विकास
न्यूज़ डेस्क,पटना
स्थानीय संपादक/दिवाकर पाण्डेय
अमिट लेख
पटना/मोतिहारी । जन सुराज के संस्थापक और पदयात्रा अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा है कि जन सुराज का अभियान बिहारियों को उनके हितों की रक्षा के लिए संगठित करने , शिक्षा तथा रोजगार के मौलिक अधिकारों को पाने के लिए जनता को जगाने और लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने का अभियान है। उक्त जानकारी आज यहां जारी एक बयान में जन सुराज के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय कुमार ठाकुर ने दी है। उन्होंने बताया है कि जन सुराज के प्रणेता प्रशांत किशोर ने कहा है कि यह पदयात्रा अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि पूरे बिहार के गांवों का भ्रमण न कर लिया जाए। उन्होंने कहा है कि बिहार के सभी जातिवादी और धर्मवादी राजनीतिक पार्टियां जन सुराज के इस अभियान से बौखलाने लगी है और अनर्गल प्रलाप कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कभी यह अफवाह फैलाते हैं कि उनके इस अभियान हेतु भाजपा तो कभी कांग्रेस मदद कर रही है। उन्होंने ऐसे अफवाहों को मनगढ़ंत एवं मानसिक दिवालियापन क़रार दिया और कहा कि जब बिहारी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए जात और धर्म की सीमाओं को तोड़ लामबंद होने लगे हैं तब बिहार की जातिवादी और धर्मवादी राजनीतिक पार्टियां बौखलाने लगी है। उन्होंने कहा कि जात और धर्म के नाम पर बिहारियों को बांटा गया और उनके हिस्से का विकास इन दलों के नेताओं ने लूट लिए। उन्होंने कहा कि बिहार को बर्बादी के इस कगार तक पहुंचाने में भाजपा, कांग्रेस, राजद और जदयू सभी समान रूप से जिम्मेदार है। इन दलों के नेताओं ने अपने शासनकाल में बिहार को लूटने में अपनी ताकत लगाई लेकिन बिहार के विकास के लिए कुछ भी नहीं किया। उक्त जानकारी आज यहां जारी एक बयान में जन सुराज के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता श्री ठाकर ने बताया कि प्रशांत किशोर ने कहा है कि अभी तक चार हजार गांवों को पैदल-पैदल घूमने से यह पता चल गया है कि गांवों में न तो कहीं सड़कें ठीक है और न ही अस्पताल में डॉक्टर दिखाई दिया। नली- गली योजना और हर घर नल -जल योजना विफल है। घर -घर शौचालय निर्माण की योजना कागजों में ही होंगी। सड़कें गंदगियों से भरे पड़े हैं। स्कूलों में पढ़ाई के बदले केवल खिचड़ी बांटे जा रहे हैं। बेरोज़गारी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। युवक गांव छोड़ दूसरे राज्यों में मजदूरी करने चले गए हैं। पदयात्रा से गांवों की समस्याओं को अपनी नज़र से देखने का मौका मिला है जिससे सरकार के दावों की पोल खुल रही है। गांवों के विकास के दावे पर की जा रही सरकारी घोषणाएं झूठ का पुलिंदा है। श्री ठाकुर ने बताया कि पदयात्रा के दौरान आम जनता जिस तरह उत्साह के साथ प्रशांत किशोर का अपने गांवों में स्वागत कर रही है और उनकी बातें गंभीरता से सुन रही उससे यह साबित हो रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा, राजद-जदयू और कांग्रेस सभी का सूपड़ा साफ हो जाएगा।








