पटना से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट :
राज्यसभा चुनाव : पार्टी को धोखा देने वाले विधायक फैसल रहमान पर नहीं होगी कार्रवाई, बुरे फंसे तेजस्वी, चली जाएगी कुर्सी
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद एक नया सियासी संकट खड़ा हो गया है। ढाका से राजद विधायक फैसल रहमान के मतदान नहीं करने के फैसले ने पार्टी नेतृत्व को मुश्किल में डाल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव चाहकर भी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, मामला सिर्फ पार्टी अनुशासन का नहीं बल्कि संवैधानिक स्थिति और राजनीतिक संतुलन का भी है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बनाए रखने के लिए कम से कम 10 प्रतिशत यानी 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में यदि राजद अपने किसी विधायक पर सख्त कार्रवाई करता है और संख्या घटती है, तो तेजस्वी यादव की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि राजद नेतृत्व फिलहाल सार्वजनिक तौर पर इस पूरे मामले के लिए एनडीए को जिम्मेदार ठहरा रहा है, लेकिन अंदरखाने स्थिति बेहद पेचीदा बनी हुई है। पार्टी अनुशासन और राजनीतिक अस्तित्व के बीच संतुलन साधना राजद के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इस बीच राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने भी राजद की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के उम्मीदवार एडी सिंह को अपेक्षित 41 वोट नहीं मिल सके। बताया जा रहा है कि राजद के एक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान नहीं किया, जिससे समीकरण बिगड़ गया। पूरे घटनाक्रम ने राजद की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पार्टी को अपने विधायकों को साथ रखना है, वहीं दूसरी ओर अनुशासनहीनता पर नरमी भविष्य में और बड़े संकट को जन्म दे सकती है। फिलहाल, तेजस्वी यादव के सामने ‘कुर्सी बचाएं या सख्ती दिखाएं’ जैसी स्थिति बन गई है, जहां हर फैसला राजनीतिक जोखिम से भरा हुआ है।








