बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
सर्व समाज की 2 से 9 वर्ष की कन्याओं को देवी मां के स्वरूप मानकर पूजन का मार्कण्डेय पुराण में उल्लेखित है विशेष महत्व
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने महाअष्टमी पर अपने आवासीय मंडप में गुरुवार को सर्व समाज की कुंवारी कन्याओं के साथ बटुक कुमारों का विधि विधान से पूजन किया।
इस मौके पर महापौर ने बताया कि नवरात्रि में 2 से 9 वर्ष की कुंवारी कन्याओं के पूजन का विशेष महत्व है। मार्कण्डेय पुराण में वर्णित प्रावधानों के अनुसार कन्याओं को मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना जाता है। महापौर श्रीमती सिकारिया ने बताया कि हमारे परिवार में प्रत्येक नवरात्रि में महाअष्टमी या नवमी तिथि को यह पूजन आयोजित किया जाता है। महापौर ने बताया वैदिक मान्यता है कि इनका पूजन करने से सुख-समृद्धि, दुखों का नाश और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है,दरिद्रता दूर करती है और उपासक को देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। समाज के सर्व समाज की छोटी कन्याओं को देवी मां के नौ रूपों का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।वैदिक मान्यता नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं के पूजन करके भोग लगाने और दक्षिणा आदि देकर खुश करने से माता प्रसन्न होती हैं। महापौर श्रीमती सिकारिया ने बताया कि 9 या नौ से अधिक कुंवारियों को देवी मां के प्रतीक रूप में पवित्र मन और आदर भाव इनकी आराधना से मन में पवित्रता और आध्यात्मिकता का भी विकास होता है।








