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Post: पंचमुखी हनुमान मंदिर में भजन गंगा कार्यक्रम का आयोजन

पंचमुखी हनुमान मंदिर में भजन गंगा कार्यक्रम का आयोजन

हमारे विशेष संवाददाता दिवाकर पाण्डेय का संकलन : 

विगत 15 वर्षों से लावारिस दिव्यांग जनों की सेवा में समर्पित संस्था- स्वरांजलि सेवा संस्थान

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

औरंगाबाद, (एक प्रतिनिधि)। मंगलवार की देर शाम स्थानीय पंचमुखी हनुमान मंदिर सह शिव मंदिर परिसर में भजन गंगा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सभी भक्तों ने समवेत स्वर में हनुमान चालीसा के पाठ से किया। भक्त डी. आनन्द ने कहा कि मंगलवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए अत्यंत शुभकारी है।

फोटो : अमिट लेख

राम भक्त हनुमान की भक्ति से साहस ,धन लाभ, और करियर में सफलता मिलती है। राष्ट्रीय अध्यक्षा और महिला समाजसेवी अंजु देवी उर्फ अंजलि आनंद ने कहा कि हनुमान जी की पूजा अर्चना से मानसिक तनाव कम होता है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र भगवान और सीता माता की कृपा प्राप्त होती है। जीवन के अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं । विभिन्न मधुर भजनों द्वारा हनुमान जी की महिमा बताई गई। शिव आज भी गुरु है, शिव भक्ति पर आधारित कई भजनों की प्रस्तुति की गई। प्रोफेसर अनुराग ने कहा कि आज के दिन को मानसिक शांति, नई ऊर्जा और हनुमान जी की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है। भक्त बबलू सिंह ने कहा कि सत्संग भजन में भाग लेने से एकाग्रता आती है। उपस्थित महिला अभियंताओं ने कार्यक्रम की सराहना की। जय श्री राम, जय हनुमान ,पंचमुखी हनुमान जी महाराज की जय, शिव शंकर भगवान की जय, आदि नारों से मंदिर परिसर गुंजायमान होता रहा। इस धार्मिक आयोजन में शशांक सिंह ,कुलदीप चौधरी, कृष्ण कुमार और बबलू सिंह का सहयोग सराहनीय रहा। इस मौके पर पुजारी वार्ड प्रतिनिधि जितेंद्र यादव,संतोष उपाध्याय, आलोक उपाध्याय, सरदार यादव,बिरजा यादव, कृष्ण कुमार, छोटू पासवान ,बाबा धर्मेंद्र कुमार , एवं भोला साव,की भूमिका सराहनीय रही। अंत में अंजू देवी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग खतरे की घंटी बजा रही है। हमें पौधारोपण करने का संकल्प लेना चाहिए। आगामी वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर 1 मई 2026 को भारत नेपाल सीमा पर बेलवा घाट परिसर में 154 वीं नारायणी गंडकी महाआरती कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। भक्त बिजेंद्र मिश्र ने कहा कि सत्य की संगति ही सत्संग है। हमें मन ,कर्म , और वचन से प्रभु की भक्ति करनी चाहिए। शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया।

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