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Post: सड़क दुर्घटना में नहीं रहा दोस्त तो उसकी पत्नी और तीन मासूम को दी नई जिंदगी

सड़क दुर्घटना में नहीं रहा दोस्त तो उसकी पत्नी और तीन मासूम को दी नई जिंदगी

पटना से हमारे विशेष संवाददाता का संकलन : 

अमोला बिगहा निवासी नीतीश ठाकुर की पिछले वर्ष मई महीने में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख
औरंगाबाद, (दिवाकर पाण्डेय)। दोस्ती के किस्से आपने बहुत सुने होंगे और ऐसी ही एक दोस्ती का मिसाल पेश किया है उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिला के देवकली निवासी नवलेश ठाकुर ने। नवलेश ने औरंगाबाद निवासी अपने दोस्त की मौत पर उसके परिवार का सहारा बनने की सोची और अब उसने जिम्मेदारी उठा भी ली। दोस्ती के इस मिसाल को देख एक तरफ लोग जहां भावुक हो उठे तो दूसरी तरफ दोस्ती की दाद देने से भी पीछे नहीं हटे। दरअसल औरंगाबाद के शाहपुर स्थित सूर्यमंदिर प्रांगण में एक शादी आयोजित की गई जिसमे शामिल होने के लिए जिला पार्षद अनिल यादव, राजद नेता डॉ रमेश यादव समेत कई अन्य लोग पहुंचे थे और सभी ने नव दंपत्ति को आशीर्वाद और भविष्य के लिए शुभकामनाएँ भी दी। शादी को लेकर लोगों ने बताया कि दोस्त की विधवा पत्नी और तीन बेटियों का सहारा बनने के लिए युवक ने शादी कर ली और जीवनभर के लिए उसे अपना कंधा दिया है। मामले को लेकर लोगों ने बताया कि औरंगाबाद सदर प्रखंड के अमोला बिगहा निवासी नीतीश ठाकुर की पिछले वर्ष मई महीने में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद पत्नी सोनी कुमारी और उसकी तीन मासूम बेटियों का सहारा कोई नहीं बचा था। उनके भरण पोषण और शिक्षा को लेकर संकट उत्पन्न हो गया। लेकिन इस संकट की घड़ी में मृतक युवक के दोस्त ने सहारा बनने की सोची और विधवा से शादी करने का निर्णय लिया। परिवार वालों की सहमति से उसने औरंगाबाद के सूर्य मंदिर प्रांगण में अपने दोस्त की विधवा से शादी भी कर ली और पूरे परिवार का सहारा बना। इस मार्मिक दृश्य को जिसने भी देखा और सुना उसके आंख नम हो गए वहीं चेहरे पर ख़ुशी भी दिखाई दिए। मामले को लेकर मृतक दोस्त के परिवार का सहारा बनने वाले दोस्त नवलेश ने बताया कि उसकी दोस्ती एक प्राइवेट कंपनी में काम करने के दौरान नीतीश से हुई थी। धीरे धीरे दोनों के बीच घनिष्ठता बढती चली गई और इसी बीच एक सड़क दुर्घटना में उसने अपने दोस्त को खो दिया। दोस्त की मौत के बाद वह उसकी पत्नी की सहायता जरुर करता था लेकिन बावजूद परिजनों को उसकी तीन मासूम बेटियों की चिंता लगी रहती थी। इसी दौरान उसने अपनी दोस्त की पत्नी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा और परिवार के लोगों से भी बातचीत की। शादी का प्रस्ताव सामने देख दोनों परिवारों ने काफी सोच विचार किया और अंत में राजी हो गए जिसके बाद एक बार फिर से एक विधवा की जिन्दगी रंगीन हो गई तो दूसरी तरफ पिता का साया खो चुकी तीन बच्चियों के सर पर पिता का हाथ मिल गया।

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