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Post: अस्पताल में इलाज के नाम पर टूटे पैर में बांध दिया कार्टन… VIDEO वायरल

अस्पताल में इलाज के नाम पर टूटे पैर में बांध दिया कार्टन… VIDEO वायरल

बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल :

रिपोर्ट : विशेष ब्यूरो, पटना

अनुमंडलीय अस्पताल का निर्माण आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे के साथ किया गया था

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान इस अस्पताल का उद्घाटन किया था

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

पटना, (दिवाकर पाण्डेय)। बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सड़क हादसे में घायल एक युवक के टूटे हुए पैर पर प्लास्टर या स्प्लिंट की जगह गत्ते का सहारा बांधा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके बाद घायल युवक को सदर अस्पताल, बेगूसराय रेफर किए जाने की बात सामने आई है। वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों के इलाज को लेकर सवाल उठने लगे है। वायरल वीडियो 15 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है। अस्पताल की पर्ची के अनुसार घायल युवक की पहचान नावकोठी प्रखंड के महेशवाड़ा वार्ड-4 निवासी सदन मोहन प्रसाद के 20 वर्षीय पुत्र कृष्ण कुमार के रूप में हुई है। कृष्ण कुमार ग्रेजुएशन का छात्र है। जानकारी के अनुसार, कृष्ण कुमार अपने भाई के साथ बाइक से जा रहा था। इसी दौरान गढ़पुरा थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के पास सड़क हादसा हो गया। बताया गया कि एक ऑटो दूसरे ऑटो को टोचन कर ले जा रहा था। इसी दौरान कृष्ण कुमार अपने भाई के साथ वहां रुका और सड़क किनारे शौच के लिए उतरा। इसी दौरान टोचन किया जा रहा ऑटो अचानक अनियंत्रित हो गया और कृष्ण कुमार को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि उसके दाहिने पैर की जांघ की हड्डी टूट गई थी। हादसे के बाद परिजन उसे इलाज के लिए मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में घायल के पैर पर प्लास्टर या अन्य जरूरी सपोर्ट देने के बजाय गत्ते का सहारा बांध दिया गया। इसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, बेगूसराय रेफर कर दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी युवक के पैर पर गत्ते जैसा अस्थायी सहारा बंधा हुआ दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अनुमंडलीय अस्पताल का निर्माण आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे के साथ किया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान इस अस्पताल का उद्घाटन किया था। ऐसे में गंभीर रूप से घायल मरीज के पैर को गत्ते के सहारे रेफर किए जाने की बात सामने आने के बाद अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे है। लोगों का सवाल है कि अगर किसी मरीज के फ्रैक्चर जैसी स्थिति में अस्पताल में जरूरी प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो अस्पताल में मौजूद संसाधनों और व्यवस्थाओं की स्थिति क्या है। हालांकि, वायरल वीडियो और उसमें दिख रही स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में पहुंचा। सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान जो भी स्वास्थ्यकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घायल युवक को गत्ते का सहारा देकर रेफर करने की स्थिति क्यों बनी और अस्पताल में उस समय जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध थी या नही।

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