रिपोर्ट : छपरा डेस्क, 15 अक्टूबर 2026
नगरा बसंतपुर के वार्ड-6 में करीब 100 ग्रामीण धरने पर बैठे, आवागमन बाधित होने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
छपरा, (सारण)। एकमा प्रखंड के एकसार पंचायत अंतर्गत नगरा बसंतपुर गांव के वार्ड नंबर-6 में आवागमन की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। विधायक निधि से बने पुल के दोनों तरफ करीब छह महीने बाद भी मिट्टी नहीं भरवाए जाने से लोगों को परेशानी हो रही है।

वहीं, वैकल्पिक रास्ता बंद हो जाने के कारण पिछले छह दिनों से ग्रामीणों का आवागमन बाधित है। समस्या से नाराज करीब 100 ग्रामीण पुल के पास धरने पर बैठ गए और आवागमन बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, पुल के बगल से आने-जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध था। आरोप है कि सामने स्थित घर के मालिक मंतोष यादव, जो बिहार पुलिस में चालक के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं, ने रास्ते को अतिक्रमण बताते हुए नहर के पोईन के पास जेसीबी से गड्ढा खुदवा दिया। इसके बाद से ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम प्रभावित :
ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बंद होने से उन्हें रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी हो रही है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। धरने पर बैठे लोगों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर रास्ता चालू कराने की मांग की।
सूचना पर पहुंचे राजस्व अधिकारी :
ग्रामीणों ने मामले की सूचना एकमा अंचलाधिकारी को दी। इसके बाद राजस्व अधिकारी (आरओ) राम प्रवेश साहू मौके पर पहुंचे। इस दौरान दीनानाथ मांझी, प्रभु यादव सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले की जांच कर आवागमन बहाल कराने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
पुल के दोनों तरफ मिट्टी भरवाने की मांग :
धरने में मदन यादव, भोला यादव, वकील यादव, नागेंद्र यादव, राजू यादव, शिवजी यादव, सुरेंद्र यादव, रुदल यादव, राहुल यादव, कृष्ण यादव, हरे राम यादव, जवाहर यादव, वार्ड सदस्य सीमा देवी, बेबी, धर्मेंद्र सिंह, हरेंद्र कुमार प्रसाद, विक्रम प्रसाद और संजीत प्रसाद सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों की मांग है कि पुल के दोनों तरफ मिट्टी भरवाकर संपर्क मार्ग को सुचारू किया जाए, ताकि लोगों का आवागमन फिर से शुरू हो सके और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। अब ग्रामीणों को प्रशासनिक पहल और समस्या के स्थायी समाधान का इंतजार है।








