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प्रमंडलीय आयुक्त ने बेतिया के जमाबंदी फर्जीवाड़ा मामले में लिया सख्त संज्ञान

रिपोर्ट : बेतिया डेस्क, 17 अक्टूबर 2026

जिलाधिकारी को दोषी कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने एवं जमाबंदी में परिवर्तन का आदेश देने वाले पदाधिकारी का नाम स्पष्ट करने का दिया निदेश

मौजा+हल्का-पूर्वी कर्गहिया, अंचल बेतिया की जमाबंदी संख्या-105 का मामला; 50 वर्षों से चली आ रही जमाबंदी को बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के शून्य कर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

–  अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। राजस्व मामलों का प्रक्रियानुसार विधिवत निष्पादन करें; इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, दोषी अधिकारियों के विरूद्ध ज़िम्मेदारी निर्धारित कर सख़्त अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रमंडलीय आयुक्त ने प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के राजस्व से संबंधित अधिकारियों को निदेश दिया है। आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर श्री गिरिवर दयाल सिंह ने पश्चिम चम्पारण जिला में जमाबंदी फ्रॉड के मामले में कड़ी कार्रवाई की है। इस संबंध में प्राप्त परिवाद पर उन्होंने जिलाधिकारी, पश्चिम चंपारण को दोषी कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का निदेश दिया है। साथ ही उन्हें, अपर समाहर्ता तथा अंचल अधिकारी को 21 अक्टूबर को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होकर जमाबंदी में परिवर्तन के आदेश में संबंधित पदाधिकारियों तथा कर्मियों की भूमिका स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। दरअसल मौजा+हल्का-पूर्वी कर्गहिया, अंचल बेतिया में अवस्थित जमाबंदी संख्या-105 के रकवा को गलत तरीके से शून्य कर दिये जाने के मामले में प्रमंडलीय आयुक्त को एक परिवाद पत्र प्राप्त हुआ था। परिवाद में उल्लेख किया गया है कि पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से जमाबंदी संख्या-105, रकवा-05 एकड़ 62.5 डिसमिल की जमाबंदी परिवादी के पिता के नाम से चली आ रही है और लगातार लगान भी जमा किया जा रहा है। परिवादी का आरोप है कि उक्त जमाबंदी को किसी अन्य, जो इनके खानदान के नहीं हैं, के नाम पर परिवर्तित कर विधिविरूद्ध ढंग से जमाबंदी कायम कर दी गई है। आधार यह बनाया गया है कि उक्त खाता-खेसरा बेतिया राज से संबंधित है, जबकि वर्तमान में उस भूमि का बेतिया राज से कोई संबंध नहीं है। विदित हो कि एक मामले में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार “लंबी चली आ रही जमाबंदी को बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के ना तो निरस्त किया जाना है न ही छेड़छाड़ करना है।” प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के जमाबंदी को शून्य कर दूसरे असंबद्ध व्यक्ति के नाम दर्ज करना प्रथम दृष्टया लाभ से प्रेरित होकर किया गया कृत्य प्रतीत होता है, जो क्रिमिनल एक्ट के तहत आता है। उन्होंने प्राथमिकी दर्ज करते हुए शीघ्र संशोधन की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा सारे तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ज़िलाधिकारी, पश्चिम चंपारण को निम्नलिखित निर्देश दिया गया है :

1. बिना किसी सक्षम प्राधिकार के आदेश से गलत ढंग से जमाबंदी में परिवर्तन कर पंजी में चढ़ाया गया है। गलत जमाबंदी को सही परिवर्तित कर सही व्यक्ति के नाम कायम करना सुनिश्चित करें। संबंधित कार्यालय के दोषी कर्मी पर प्राथमिकी दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई करें।

2. जिला पदाधिकारी, पश्चिम चम्पारण/ अपर समाहर्ता (राजस्व), पश्चिम चम्पारण अथवा किस पदाधिकारी के आदेश से उक्त जमाबंदी को परिवर्तित कर अन्य के नाम किया गया और मूल जमाबंदी को शून्य किया गया, उस पदाधिकारी का नाम एवं आदेश उपस्थापित करें।

3. जो नयी जमाबंदी क़ायम की गई है वह मात्र 53 डी0 है। शेष जमीन खाता में विभिन्न प्लॉट और खेसरा सम्मिलित है। इसका कुल रकवा 05 एकड़ 62.5 डी0 है। इसकी जमाबंदी कहाँ चली गई? यह पूर्ण रूप से जमाबंदी रद्दीकरण का मामला नहीं, बल्कि फ्रॉड किये जाने का मामला है। इसमें विशेष रूप से किसी खास मंशा के तहत जमाबंदी परिवर्तन किया जाना प्रतीत होता है। इसे तत्काल ठीक करें।

4. यह स्पष्ट करें कि किस परिस्थिति में ऐसा किया गया है और जिला पदाधिकारी/अपर समाहर्ता (राजस्व) के स्तर से इस आलोक में कोई आदेश यदि अंचलाधिकारी, बेतिया को निर्गत किया गया था तो किस आधार पर निर्गत किया गया था।

5. अंचलाधिकारी, बेतिया यह स्पष्ट करें कि जब जमाबंदी ऑनलाइन अंकित रहती है तब उसमें कैसे छेड़छाड़ किया गया। जमाबंदी में छेड़छाड़ करना क्रिमिनल एक्ट के तहत आता है। दोषी कर्मी के विरुद्ध क्रिमिनल प्रोसिडिंग चलाई जाए और किस पदाधिकारी के आदेश पर जमाबंदी में परिवर्तन किया गया, वह भी स्पष्ट करें। यदि इसमें किसी कर्मचारी की भूमिका है तो इसे भी स्पष्ट करें ताकि इनके विरुद्ध भी कार्रवाई प्रारंभ की जा सके। प्रमंडलीय आयुक्त ने निदेश दिया है कि दिनांक 21.10.2026 को पूर्वाह्न 12:00 बजे तक संबंधित प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। प्रमंडलीय आयुक्त ने प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के राजस्व से संबंधित अधिकारियों को निदेश दिया है कि राजस्व मामलों का प्रकियानुसार एवं विधिवत निष्पादन करें। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोई भी मामला प्रकाश में आने पर दोषी अधिकारियों के विरूद्ध ज़िम्मेदारी निर्धारित कर सख़्त अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनहित के मामलों को पदाधिकारीगण सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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