



प्रादेशिक विशेष ब्यूरो दिवाकर पाण्डेय की रिपोर्ट :
नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गयी है
न्यूज डेस्क, राजधानी पटना
दिवाकर पाण्डेय
– अमिट लेख
पटना, (विशेष ब्यूरो)। नियोजित शिक्षकों की सक्षमता परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गयी है। सक्षमता परीक्षा में तीन बार परीक्षा देने पर भी उत्तीर्ण नहीं होने वाले अथवा इसमें शामिल नहीं होने वाले नियोजित शिक्षकों पर विचार करने के लिए यह समिति बनायी गई है। यह समिति एक सप्ताह के अंदर अपनी अनुशंसा राज्य सरकार को देगी। समिति के गठन का आदेश विभाग ने गुरुवार को जारी कर दिया है। इस समिति में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष, निदेशक प्राथमिक शिक्षा, निदेशक राज्य शिक्षा, शोध एवं प्रशिक्षण परिषद तथा निदेशक माध्यमिक शिक्षा सदस्य के रूप में रखा गया है। मालूम हो कि बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2023 में इसका प्रावधान किया गया है कि जो शिक्षक सक्षमता परीक्षा में तीन बार के अवसर मिलने पर भी उत्तीर्ण नहीं होते हैं, अथवा इसमें शामिल नहीं होते हैं, उनपर अगल से विचार किया जाएगा। इसी संदर्भ में यह समिति गठित की गई है। राज्य के साढ़े तीन लाख से अधिक नियोजित शिक्षकों का राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए सक्षमता परीक्षा ली जा रही है। इसके लिए 26 दिसंबर, 2023 को राज्य कैबिनेट ने बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 की स्वीकृति दी थी। इसके तहत नियोजित शिक्षक सक्षमता परीक्षा देंगे और आवंटित स्कूल में योगदान करेंगे। योगदान के साथ ही वह विशिष्ट शिक्षक कहलाएंगे। इसके साथ ही उन्हें बिहार लोक सेवा आयोग द्वरा बहाल शिक्षकों के अनुरूप वेतनमान व अन्य लाभ मिलने लगेगा। विशिष्ट शिक्षकों के पद को स्थानांतरणीय किया गया है। प्रारंभ में सक्षमता परीक्षा में शामिल होने के समय शिक्षकों से तीन जिलों का विकल्प मांगा जाएगा, जहां पर वे अपनी सेवा देना चाहते हैं। सक्षमता परीक्षा में उनकी मेधा क्रमांक के आधार पर उन्हें उनके द्वारा विकल्प वाले जिले में पदास्थापित किया जाएगा। तीनों विकल्प में नहीं आ अन्यता रेंडमनाइजेशन के आधार पर जिला आवंटित किया जाएगा। विशिष्ट शिक्षकों को सामान्य रूप से जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम, छात्र-शिक्षक अनुपात अथवा जनहित में प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए जिला के अंतर्गत स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद विभाग द्वारा तय की गई अवधि को पूरा होने पर जिला के अंदर या बाहर स्थानांतरित किया जाएगा।