बेतिया से उप- संपादक का चश्मा :
जनवरी 2024 से लेकर बोर्ड की विगत बैठकों में पारित योजनाओं को करीब दो साल से लटकाने का नगर पार्षदगण ने किया विरोध
नगर निगम क्षेत्र की सैकड़ों विकास योजनाओं को बोर्ड से प्रशासनिक स्वीकृति तक मिल जाने के के बाद भी अनेकों योजनाओं का क्रियान्वयन लटकाने पर किया बहिष्कार
करोड़ों का आवंटन रहते नगर निगम कार्यालय की उदासीनता से जनता को विकास योजनाएं अवरुद्ध होने से विगत बरसात में तबाही झेलने को लेकर भी किया बहिष्कार
बोले आंदोलित नगर पार्षद- योजनाओं का क्रियान्वयन कराए जाने तक जारी रहेगा नगर निगम बोर्ड की बैठकों का लगातार विरोध और बहिष्कार
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। महापौर गरिमा देवी सिकारिया की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित नगर निगम बोर्ड की सामान्य बैठक कोरम पूरा होने के साथ महापौर की अनुमति लेकर बैठक की कार्रवाई आरंभ की गई। परन्तु बैठक शुरू होते ही पार्षदगण द्वारा यह से कहा जाने लगा कि नगर निगम बोर्ड की आज की बैठक का कोई औचित्य ही नहीं है। यदि बोर्ड से पूर्व में पारित और प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई योजनाओं का क्रियान्वयन अथवा कार्यादेश नगर निगम कार्यालय द्वारा नहीं दिया जा रहा है तो इस परिस्थिति में बोर्ड द्वारा किसी भी एजेंडा पर विचार करने का कोई औचित्य ही नहीं है। आंदोलित पार्षदगण द्वारा यह भी कहा गया कि जनवरी 2024 से लेकर अब तक की बोर्ड की जितनी बैठकें हुई हैं, उसमें नगर निगम क्षेत्र के विकास की विभिन्न योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति तक होने के बाद भी अनेकों योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कराया जा सका है। पार्षदगण का यह भी कहना था कि नगर निगम कार्यालय की उदासीनता एवं शिथिलता के कारण नगर निगम क्षेत्र का विकास पूर्णतःअवरुद्ध है। विकास योजनाओं के रुकने के चलते, जारी वर्ष में ही हुई भारी बरसात के मौसम में भी नगर निगम क्षेत्र की जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। आक्रोशित पार्षदगण ने कहा कि नगर निगम में करोड़ों के आवंटन की राशि उपलब्ध है, योजनाएं बोर्ड के द्वारा पारित हैं, फिर भी नागरिकों के कष्ट का कोई निराकरण नहीं हो पा रहा है। नगर निगम कार्यालय की विकास और समस्याओं के निदान के प्रति उदासीनता एवं अकर्मण्यता के चलते हम पार्षदगण जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। इनके द्वारा यह भी कहा गया कि ऐसी स्थिति में बोर्ड की बैठक करना और उसमें पुनः एजेंडा को पारित करने का कोई प्रश्न ही नहीं पैदा होता है,जब तक की पूर्व में पारित विकास योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो जाता है। ऐसी स्थिति में आंदोलित पाषर्दगण के द्वारा हाथ उठा कर, आज की बैठक के बहिष्कार की घोषणा की गई और आज की बैठक का बहिष्कार किया गया। इस दौरान सभी के द्वारा कहा गया कि जब तक पूर्व से पारित सभी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जाता है, तब तक हम बैठकों का बहिष्कार करते रहेंगे। उनके बहिष्कार के बाद बैठक में बचे हुए पार्षदों द्वारा भी बैठक में हंगामे का ऐसा दृश्य उत्पन्न कर दिया गया की बैठक को संचालित करना संभव नहीं होने के कारण एवं बहिष्कार एवं हंगामे को देखते हुए विवश होकर महापौर गरिमा देवी सिकारिया के द्वारा शनिवार की बैठक में बिना किसी प्रस्ताव पर निर्णय लिए बैठक की समाप्ति की घोषणा की गई।








