बेतिया से उप-संपादक का चश्मा :
उनका कहना था कि “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” का नारा अब केवल शब्दों तक सीमित रह गया है, जबकि वास्तव में बेटियाँ और महिलाएँ कहीं सुरक्षित नहीं हैं
न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़
– अमिट लेख
बेतिया, (मोहन सिंह)। 10 जनवरी 26 को बेतिया की सड़कों पर बिहार महिला समाज की ओर से महिलाओं और बेटियों के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया।

प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देशभर में घटित महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के खिलाफ सरकार और प्रशासन को चेतावनी देना था। महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, मेरठ में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण, खगड़िया में अबोध बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या, तथा उत्तराखंड में एक मंत्री के पति द्वारा बिहार की लड़कियों और महिलाओं के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं की इज्जत, आबरू और जान-माल की रक्षा करने में पूरी तरह विफल हो रही है। उनका कहना था कि “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” का नारा अब केवल शब्दों तक सीमित रह गया है, जबकि वास्तव में बेटियाँ और महिलाएँ कहीं सुरक्षित नहीं हैं। इस अवसर पर महिलाओं ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन कर यह संदेश दिया कि देश की महिलाओं और बेटियों के खिलाफ लगातार हो रहे अपराधों पर सरकार गंभीर नहीं है। प्रदर्शन में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिनके कंधों पर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वही दल और नेता समाज में महिलाओं के अपमान और जलील करने वाले बन गए हैं। प्रदर्शन में बिहार महिला समाज पश्चिम चंपारण इकाई की अध्यक्ष आरती, सचिव लक्की, गायत्री देवी सहित सैकड़ों महिलाएँ उपस्थित रहीं। महिलाएँ प्रदर्शन में ठेठ बिहारी गीतों के माध्यम से भी सत्ता और उसके समर्थकों को करारा जवाब देती रहीं, जिससे विरोध और भी प्रभावशाली बना। महिलाओं ने सरकार और प्रशासन पर यह आरोप भी लगाया कि पुलिस और संबंधित विभाग अपराधों के प्रति त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने में विफल हो रहे हैं, जिससे अपराधी हौसले में हैं और समाज में महिलाओं की सुरक्षा लगातार खतरे में है। बेतिया से उठता यह आक्रोश यह संदेश देता है कि देश की बेटियाँ और महिलाएँ लगातार सुरक्षित नहीं हैं और जब तक अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलती तथा सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित नहीं होती, समाज इस पर चुप नहीं बैठेगा। बिहार महिला समाज ने हर राजनीतिक दल और प्रशासन से यह स्पष्ट मांग की कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अंत में महिलाओं ने यह चेतावनी भी दी कि उनका संघर्ष और आवाज तभी रुकेगी जब तक अपराधियों को कठोर सजा नहीं मिलेगी और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। इस प्रदर्शन के माध्यम से बिहार महिला समाज ने पूरे देश को संदेश दिया कि हम चुप नहीं बैठेंगे, और बेटियों की रक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।








