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Post: निजी विद्यालयों की मनमानी पर जिला प्रशासन सख्त, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

निजी विद्यालयों की मनमानी पर जिला प्रशासन सख्त, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

बेतिया से उप-संपादक का चश्मा : 

निजी स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी, पारदर्शिता पर जोर

शुल्क और यूनिफॉर्म नियमों पर सख्ती

न्यूज़ डेस्क, ए.एल.न्यूज़

– अमिट लेख

बेतिया, (मोहन सिंह)। पश्चिम चंपारण जिले में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी-सह-जिला दंडाधिकारी तरनजोत सिंह द्वारा जारी आदेश में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। इस निर्णय से जिले के करीब डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। जिले में वर्तमान में 552 प्रस्वीकृति प्राप्त निजी विद्यालय और 39 सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों के खिलाफ लंबे समय से अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूली, अनावश्यक फीस, तथा विशेष दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन द्वारा इन शिकायतों की गंभीरता से जांच की गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक निश्चित दुकान या विक्रेता से किताबें, कॉपियां, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावकों को अपनी सुविधा और आर्थिक स्थिति के अनुसार किसी भी दुकान से सामान खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होगी। इसके अलावा, सभी विद्यालयों को अपनी फीस संरचना, पाठ्यपुस्तकों की सूची, यूनिफॉर्म का विवरण और अन्य आवश्यक सामग्री की जानकारी विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी। जहां संभव हो, यह जानकारी विद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करानी होगी, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों द्वारा बार-बार यूनिफॉर्म बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाएगी। एक बार तय की गई यूनिफॉर्म को कम से कम तीन वर्षों तक नहीं बदला जाएगा, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। साथ ही, छात्रों को बड़े भाई-बहनों की पुरानी किताबों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने का भी निर्देश दिया गया है।आदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत नामांकित आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। ऐसे छात्रों को अन्य विद्यार्थियों के समान सभी सुविधाएं प्रदान करना अनिवार्य होगा। स्कूलों की परिवहन व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। सभी स्कूल वाहनों में सीसीटीवी, प्राथमिक उपचार किट और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य किया गया है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के प्राचार्य, संचालक या प्रबंधक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, नगर निकाय, प्रखंड प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण कर नियमों के पालन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

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