



विशेष ब्यूरो बिहार की रिपोर्ट :
राज्य में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है
न्यूज़ डेस्क, राजधानी पटना
दिवाकर पाण्डेय
– अमिट लेख
पटना, (ए.एल.न्यूज़)। बिहार सरकार उच्च स्तरीय सुरक्षा प्राप्त भीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहती है। राज्य में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियां हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। आधुनिक और अधिक सुरक्षित वाहनों की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिससे भीआईपी मूवमेंट के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो। बिहार पुलिस मुख्यालय ने इस योजना का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा था, जिसे अब मंजूरी मिल गई है। इसके तहत टोयोटा फॉर्च्यूनर मॉडल की 16 बुलेटप्रूफ गाड़ियां खरीदी जाएंगी। पहले 20 बुलेटप्रूफ गाड़ियों की खरीद का प्रस्ताव था, लेकिन उसे रद्द कर दिया गया। अब सरकार ने नए सिरे से सिर्फ 16 गाड़ियां खरीदने का फैसला किया है।ये गाड़ियां उन भीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाएंगी, जिनकी जान को अधिक खतरा हो सकता है। सरकार ने पुराने प्रस्ताव की समीक्षा के बाद अधिक किफायती और प्रभावी योजना बनाई है। नई गाड़ियों में अत्याधुनिक बुलेटप्रूफिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। बिहार सरकार सिर्फ भीआईपी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सचिवालय की सुरक्षा को भी हाईटेक बना रही है। इसके तहत राज्य सचिवालय में नए अत्याधुनिक सीसीटीभी कैमरे लगाए जाएंगे।इस योजना पर 29.23 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पुराना सचिवालय, अधिवेशन भवन, सिंचाई भवन, विकास भवन, सूचना भवन और विश्वेश्वरैया भवन में यह कैमरे लगाए जाएंगे।सभी प्रवेश द्वार, गलियारे और पार्किंग क्षेत्र CCTV निगरानी में रहेंगे।इस परियोजना को बेल्ट्रॉन के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सचिवालय में भीआईपी और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। कई बार सुरक्षा उल्लंघन की घटनाएं सामने आई हैं, जिसे रोकने के लिए हाईटेक कैमरे जरूरी माने जा रहे हैं। नई सुरक्षा प्रणाली से सचिवालय की हर गतिविधि पर 24×7 निगरानी रखी जा सकेगी। भीआईपी सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा, जिससे राज्य के उच्च पदस्थ अधिकारियों और नेताओं की सुरक्षा में कोई चूक न हो। सचिवालय में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था सख्त होगी। राज्य में कानून-व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। विपक्षी दल इस खर्चे को लेकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन सरकार का मानना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वोपरि है।